माफिया पंकज यादव अपराधियों को शरण देता था पंकज, पीपीगंज में दर्ज है गैंगस्टर का केस
माफिया मुख्तार अंसारी सिवान के मोहम्मद शहाबुद्दीन और मुन्ना बजरंगी गिरोह के शार्प शूटर रह चुके मऊ के पंकज यादव को बुधवार सुबह एसटीएफ और फरह पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। जबकि उसका साथी भागने में कामयाब हो गया। पंकज 20 हत्या के मामले में वांछित चल रहा था। उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
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मथुरा के फरह थाना क्षेत्र में गोरखपुर एसटीएफ से हुए मुठभेड़ में मारा गया पंकज यादव पीपीगंज में हत्या कर लूट की वारदात के आरोपितों को शरण दिया था। वर्ष 2016 में उसने ज्वेलरी व्यापारी के मुनीम की गोली मारकर हत्या कर दी थी और गहने लूटकर फरार हो गया था।
घटना में शामिल उसके साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर गहने बरामद किए थे, लेकिन पंकज नहीं पकड़ा गया था। बाद में उसपर गैंगस्टर का केस भी दर्ज किया गया था।
मऊ के रानीपुर क्षेत्र के ताहिरपुर का मूल निवासी पंकज यादव पर अलग-अलग थानों में कुल 38 मुकदमे दर्ज थे। जिसमें से दो मुकदमे गोरखपुर के पीपीगंज थाने में भी दर्ज हैं। इसमें एक हत्या कर लूट, आपराधिक साजिश का और दूसरा गैंगस्टर का केस दर्ज है। उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
गोरखपुर एसटीएफ के प्रभारी निरीक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि एसटीएफ उसकी तलाश में जुटी थी। सूचना मिलने पर आगरा एक्सप्रेस से पीछा करते हुए मथुरा में घेराबंदी की गइ तो आरोपित ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ की गोली से घायल हो गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पीपीगंज क्षेत्र में दो अप्रैल 2016 को मुनीम की हत्या कर लूट की वारदात में यह शामिल था। व्यापारी तेज प्रताप वर्मा को एक व्यक्ति ने दो अप्रैल 2016 को फोन किया था। गहने लेकर वह अपने मुनीम आफताब को लेकर गए थे, जहां पर बदमाशों ने वारदात की थी।
आरोपित कोईल और सुनील के गिरफ्तार होने के बाद दोनों ने बताया था कि गहने को लेकर वह पंकज यादव के घर मऊ गए थे। उसी ने दोनों को शरण दिया था। इसके आधार पर पंकज यादव को आरोपित बनाया गया था।

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