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महाकुंभ भगदड़: प्रशासन की बड़ी चूक आई सामने, हेल्पलाइन नंबर 1920 जारी

 महाकुंभ भगदड़: प्रशासन की बड़ी चूक आई सामने, हेल्पलाइन नंबर 1920 जारी 

डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया कि भगदड़ के समय संगम पर जो लोग लेटे हुए थे, उनके ऊपर भीड़ चढ़ गई। आज 29 जनवरी को शासन से सख्त निर्देश थे कि कोई वीआईपी मूवमेंट नहीं रहेगा।

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विस्तार 

महाकुंभ मेले में भगदड़ को लेकर महाकुंभ नगर मेला क्षेत्र प्रशासन ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए हैं। जिसमें बताया गया है कि मंगलवार की रात को मची भगदड़ में 30 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। साथ ही 60 लोग घायल हुए हैं। महाकुंभ मेला क्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बैरिकेड्स टूटने की वजह से भगदड़ हुई। प्रशासन इसे ही अहम वजह बता रहा है।

डीआईजी ने बताया कि महाकुंभ में कल रात 1 से 2 बजे के बीच भगदड़ हुई। जिसमें घायल हुए 90 लोगों को अस्पताल लगाया गया। इनमें से 30 लोगों ने दम तोड़ दिया। जिसमें से 25 लोगों की शिनाख्त हो गई है। हादसे में जान गंवाने वालों में कर्नाटक के चार, गुजरात के एक, असम के एक श्रद्धालु की मौत हुई है। शेष की पहचान की जानी बाकी है। 60 लोग घायल हैं। कुछ घायलों को परिवार वाले लेकर चले गए। इसके अलावा 36 घायलों का इलाज स्थानीय मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। भगदड़ के बाद राहत और बचाव कार्य करते हुए ग्रीन कोरिडोर बनाया गया था।


29 जनवरी को नहीं था कोई वीआईपी मूवमेंट: डीआईजी

डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया कि भगदड़ के समय संगम पर जो लोग लेटे हुए थे, उनके ऊपर भीड़ चढ़ गई। आज 29 जनवरी को शासन से सख्त निर्देश थे कि कोई वीआईपी मूवमेंट नहीं रहेगा। जो भी मुख्य स्नान पर्व हैं उस पर कोई वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा।

मीडिया से डीआईजी ने की यह अपील

भगदड़ से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे डीआईजी वैभव कृष्ण ने मीडिया के सवालों के उत्तर नहीं दिए और उन्होंने कहा कि हमें लोगों को उनके घरों तक पहुंचाना, हाथ जोड़कर निवेदन है कि हमारा सहयोग कीजिए।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला प्रशासन ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला प्रशासन द्वारा एक हेल्पलाइन नंबर 1920 जारी किया गया है, जिससे कोई व्यक्ति अगर गायब है तो उसके संबंध में जानकारी की जा सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि इस समय स्थिति सामान्य है। 

मुख्यमंत्री द्वारा सभी पूज्यनीय महामंडलेश्वर, संतों और अखाड़ों से वार्ता कर आग्रह किया गया कि अमृत स्नान थोड़ी देर से किया जाए। सभी संतों ने इस बात को माना और आज अमृत स्नान थोड़ी देर से हुआ। जोकि सकुशल संपन्न हुआ है।

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