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हाथरस: लापता अग्निवीर सचिन पौनिया मृत घोषित, 4 महीने बाद टूटा परिवार का सब्र

 हाथरस/उत्तरकाशी:

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में अगस्त माह में आए प्राकृतिक संकट के बाद लापता हुए हाथरस के लाल, अग्निवीर सचिन पौनिया (23) को प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया है। यह घोषणा भटवाड़ी (उत्तरकाशी) के एसडीएम द्वारा की गई है, जिसके बाद सचिन के गांव करील (मुरसान) में शोक की लहर दौड़ गई है।

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क्या था पूरा मामला? (बैकग्राउंड)

सचिन पौनिया 30 अक्टूबर 2023 को अग्निवीर के रूप में भारतीय सेना का हिस्सा बने थे। ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली तैनाती 19 जून को उत्तराखंड की हर्षिल घाटी में हुई थी। 5 अगस्त 2024 को हर्षिल में बादल फटने की भयावह घटना हुई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य के लिए सचिन समेत 11 जवानों की टीम भेजी गई थी। इसी ऑपरेशन के दौरान सचिन लापता हो गए थे। लंबे समय तक चले सर्च ऑपरेशन और डीएनए टेस्ट मैच न होने के बाद, अब प्रशासन ने उन्हें मृत मान लिया है।

कानूनी प्रक्रिया और आपत्ति का समय

एसडीएम सदर राजबहादुर सिंह के अनुसार, 14वीं बटालियन राजपूताना राइफल्स के जवान सचिन को 18 दिसंबर को मृत घोषित किया गया है। हालांकि, प्रशासन ने इस संबंध में किसी भी प्रकार की आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया है।

परिवार का संघर्ष और भावुक पल

सचिन के पिता चंद्रवीर सिंह, मां लक्ष्मी और बहन श्वेता पिछले चार महीनों से हर मंदिर में उनके सकुशल लौटने की प्रार्थना कर रहे थे। बहन श्वेता को उम्मीद थी कि उसका भाई देश सेवा के साथ-साथ जीवन में नई ऊंचाइयों को छुएगा। 4 अगस्त को हुई आखिरी फोन कॉल अब परिवार के लिए अंतिम याद बनकर रह गई है। इकलौते बेटे को खोने के गम में मां का बुरा हाल है।

जनता पर प्रभाव और सामाजिक असर

इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा है, बल्कि पूरे हाथरस के युवाओं को झकझोर कर रख दिया है। सचिन ने गांव के ही इंटर कॉलेज से पढ़ाई की और एनसीसी के माध्यम से सेना में जाने का सपना पूरा किया था। उनकी शहादत (ड्यूटी के दौरान लापता होना और अब मृत घोषित होना) क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणा भी है और प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका का एक दर्दनाक चेहरा भी।

पत्रकार की कलम से (विश्लेषण)

यह घटना दर्शाती है कि हमारे सैनिक न केवल सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ते हैं, बल्कि देश के भीतर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं में भी अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। सचिन जैसे युवा अग्निवीरों का साहस अतुलनीय है। हालांकि, शव न मिल पाना और केवल कागजों पर 'मृत' घोषित होना परिवार के लिए उस जख्म जैसा है जो कभी नहीं भर सकता। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ित परिवार को सभी सैन्य सम्मान और सहायता समय पर प्राप्त हो।

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