कफ सिरप तस्करी कांड: जौनपुर के पूर्व सपा विधायक पर ईडी का शिकंजा
जौनपुर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नशीले कफ सिरप की अवैध तस्करी के बड़े सिंडिकेट में अब राजनीतिक गलियारों से भी नाम जुड़ने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में जौनपुर जिले की शाहगंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के एक पूर्व विधायक का नाम इस घोटाले (काण्ड) में सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जांच के दौरान कई ऐसी फर्जी दवा कंपनियों का पता चला है, जिनमें इन पूर्व विधायक के वित्तीय लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं।
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| कफ सिरप कांड :-up prime news |
क्या है पूरा मामला?
इस कफ सिरप काण्ड की जड़ें बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित टाटा और शुभम जायसवाल की फर्जी दवा कंपनियों से जुड़ी हैं। ईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि इन कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये का हेरफेर किया गया है। इसी कड़ी को जोड़ते हुए अब जौनपुर के पूर्व विधायक का नाम भी जांच के दायरे में आ गया है। सूत्रों के अनुसार, इन फर्जी कंपनियों में पूर्व विधायक ने बड़ी रकम निवेश की थी। फिलहाल ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि यह पैसा केवल निवेश था या फिर नशीली सिरप की सप्लाई में मिली कमीशन का हिस्सा।
ईडी की कार्रवाई तेज
प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व विधायक की संपत्तियों और पिछले एक साल के बैंक लेनदेन का ब्यौरा खंगालना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही पूर्वांचल के कुछ बाहुबलियों और बड़े नेताओं के साथ उनके संबंधों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि पर्याप्त सबूत मिलते ही ईडी पूर्व विधायक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी करेगी। दूसरी ओर, सिरप प्रकरण से जुड़े तीन दवा फर्म संचालकों को भी नोटिस भेजा गया था, लेकिन वे तय समय पर पेश नहीं हुए, जिसके बाद उन्हें दोबारा नोटिस भेजने की तैयारी है।
सार्वजनिक प्रभाव और स्वास्थ्य का संकट
कोडीन युक्त कफ सिरप का उपयोग नशे के तौर पर किया जाता है, जो युवाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इस तरह की तस्करी न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज में नशे की लत को बढ़ावा देती है। जब इस तरह के अपराधों में रसूखदार लोगों के नाम आते हैं, तो यह सरकारी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
पत्रकारिता विश्लेषण (Quick Analysis)
यह मामला केवल आर्थिक गबन का नहीं बल्कि एक बड़े 'ड्रग नेक्सस' की ओर इशारा करता है। राजनीतिक संरक्षण के कारण ही ऐसे अवैध धंधे सालों तक फलते-फूलते हैं। ईडी और एसटीएफ की यह संयुक्त सख्ती इस गठजोड़ को तोड़ने में अहम साबित हो सकती है। आगामी चुनावों से पहले इस खुलासे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी सरगर्मी बढ़ा दी है।

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