यूपी कफ सिरप कांड: अब शिकंजे में फुटकर दवा व्यापारी, एसटीएफ ने सौंपी लिस्ट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी के बड़े नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। इस मामले की गहराई से जांच कर रही एसटीएफ (Special Task Force) ने अब उन फुटकर दवा व्यापारियों पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो इस गैरकानूनी कारोबार में पर्दे के पीछे से साथ दे रहे थे।
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| कफ सिरप कांड :-up prime news |
क्या है पूरा मामला?
एसटीएफ की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, सोनभद्र और धनबाद जैसे शहरों के कई छोटे दवा दुकानदार इस बड़े रैकेट का हिस्सा थे। ये व्यापारी महज मोटे कमीशन के लालच में गिरोह के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह के साथ मिलकर कफ सिरप की तस्करी में सहयोग कर रहे थे। एसटीएफ ने ऐसे संदिग्ध व्यापारियों की एक पूरी सूची तैयार कर ली है और उसे एसआईटी (SIT) को सौंप दिया है।
कानूनी कार्रवाई हुई तेज
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आईजी (कानून-व्यवस्था) एलआर कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। ताजा अपडेट के अनुसार:
पूछताछ की तैयारी: एसआईटी जल्द ही सूची में शामिल सभी दुकानदारों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाएगी।
ईडी की एंट्री: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी आरोपियों—विभोर राणा और विशाल राणा—के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है और उनकी संपत्ति का ब्योरा खंगाल रही है।
कड़ी धाराएं: आरोपियों पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धाराएं बढ़ाने पर भी कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
पुलिस का सख्त रुख: डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज एफआईआर में नए नाम जोड़े जा रहे हैं।
पब्लिक इम्पैक्ट (जनता पर असर):
दवा व्यापारियों पर हो रही इस कार्रवाई का सीधा असर समाज की सुरक्षा पर पड़ेगा। कोडीन युक्त सिरप का नशे के तौर पर इस्तेमाल युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। इस सख्त कदम से उन मेडिकल स्टोर संचालकों में डर पैदा होगा जो चंद रुपयों के लिए अवैध बिक्री करते हैं, जिससे आम जनता को सही और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
यूपी प्राइम न्यूज़ एनालिसिस:
यह मामला केवल एक तस्करी का रैकेट नहीं है, बल्कि यह मेडिकल एथिक्स और पुलिस व्यवस्था में सेंधमारी का भी उदाहरण है। एक बर्खास्त सिपाही का मास्टरमाइंड के साथ शामिल होना यह दर्शाता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद थे। हालांकि, एसटीएफ और एसआईटी की संयुक्त कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।

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