वाराणसी: पायलट ने कहा 'शिफ्ट खत्म, अब नहीं उड़ाऊंगा विमान', फंसे रहे 179 यात्री
वाराणसी: लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब इंडिगो एयरलाइंस के एक पायलट ने उड़ान भरने से साफ मना कर दिया। पायलट का तर्क था कि उसकी ड्यूटी की समय सीमा (Shift) समाप्त हो चुकी है और अब वह विमान नहीं उड़ाएगा। इस फैसले की वजह से कोलकाता जाने वाले 179 यात्री एयरपोर्ट पर ही फंस गए।
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| Indigo flight ✈️ photo:-up prime news |
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, इंडिगो की यह फ्लाइट मूल रूप से दोपहर 1 बजे कोलकाता से वाराणसी पहुंचने वाली थी। लेकिन खराब मौसम और घने कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) कम होने की वजह से यह विमान लगभग चार घंटे की देरी से शाम 5 बजे वाराणसी पहुंचा।
नियम के मुताबिक, इसी विमान को वापस यात्रियों को लेकर कोलकाता जाना था। सभी 179 यात्री सुरक्षा जांच और चेक-इन की प्रक्रिया पूरी कर टर्मिनल बिल्डिंग में बोर्डिंग का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच पायलट ने 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन' (FDTL) का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए और विमान छोड़कर होटल के लिए रवाना हो गया।
यात्रियों का फूटा गुस्सा, एयरलाइंस ने की वैकल्पिक व्यवस्था
जब यात्रियों को पता चला कि फ्लाइट कैंसिल होने की कगार पर है, तो एयरपोर्ट पर भारी हंगामा शुरू हो गया। यात्रियों ने एयरलाइंस प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ती देख अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और यात्रियों को शांत कराया। अंततः, एयरलाइंस ने सभी यात्रियों के लिए अलग-अलग होटलों में ठहरने और भोजन का प्रबंध किया। इन यात्रियों को अगले दिन यानी बुधवार को दूसरी फ्लाइट से कोलकाता भेजा गया।
विशेषज्ञों की राय और विश्लेषण
इस घटना पर वाराणसी एयरपोर्ट के निदेशक पुनीत गुप्ता ने स्पष्ट किया कि विमानन क्षेत्र में 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन' (FDTL) एक अनिवार्य सुरक्षा मानक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चालक दल का कोई भी सदस्य अत्यधिक थकान की स्थिति में विमान न उड़ाए, जिससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।
UP Prime News Analysis:
यह घटना एयरलाइंस के लॉजिस्टिक मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। हालांकि पायलट का फैसला सुरक्षा नियमों के तहत सही था, लेकिन बैकअप क्रू (Backup Crew) की अनुपलब्धता ने एयरलाइंस की कार्यप्रणाली की कमी को उजागर किया है। ऐसे तकनीकी और कानूनी पेंचों के बीच सबसे ज्यादा नुकसान आम यात्री का होता है, जिसका समय और मानसिक शांति दोनों प्रभावित होते हैं।

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