Breaking News

UP B.Ed. Teachers: ब्रिज कोर्स मामले में हाई कोर्ट की बड़ी राहत, अब सशर्त आवेदन कर सकेंगे शिक्षक

 मुख्य समाचार: यूपी के बीएड शिक्षकों को हाई कोर्ट से अंतरिम राहत, नौकरी पर मंडराता खतरा टला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत बीएड (B.Ed.) डिग्रीधारी शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने ब्रिज कोर्स (Bridge Course) से जुड़े एक विवादित मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह याची शिक्षकों को इस कोर्स के लिए 'सशर्त' आवेदन करने की अनुमति दे।

Allahabad high court :-up prime news








क्या है पूरा मामला?

मामले की जड़ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 6 अक्टूबर 2025 और 13 दिसंबर 2025 को जारी किए गए शासनादेश हैं। इन आदेशों के तहत, प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त बीएड डिग्रीधारी सहायक अध्यापकों के लिए छह महीने का ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस प्रशिक्षण के लिए आवेदन नहीं करेंगे, उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। इसी आदेश के खिलाफ पंकज शर्मा और 24 अन्य शिक्षकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

शिक्षकों की दलील और कोर्ट का रुख

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने पहले ही राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के माध्यम से NCTE की अधिसूचना के अनुसार यह छह महीने का ब्रिज कोर्स पूरा कर लिया है। शिक्षकों का तर्क है कि एक बार वैध योग्यता हासिल करने के बाद, दोबारा उसी प्रशिक्षण के लिए मजबूर करना तर्कसंगत नहीं है।

दूसरी ओर, सरकारी पक्ष ने दलील दी कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश दिया कि अगली सुनवाई (9 जनवरी 2026) तक इन शिक्षकों को अस्थायी रूप से आवेदन करने का मौका दिया जाए।

जनता और शिक्षकों पर प्रभाव (Public Impact)

इस आदेश से प्रदेश के हजारों बीएड शिक्षकों को बड़ी मानसिक राहत मिली है, जिन्हें नौकरी से निकाले जाने का डर सता रहा था। यदि कोर्ट यह हस्तक्षेप नहीं करता, तो कई अनुभवी शिक्षकों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता था, जिसका सीधा असर सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता।

UP Prime News विश्लेषण:

यह मामला नीतिगत नियमों और पूर्व में प्राप्त की गई डिग्रियों के बीच के टकराव को दर्शाता है। कोर्ट का यह फैसला संतुलित है क्योंकि यह शिक्षकों की नौकरी को तात्कालिक सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि अंतिम निर्णय 9 जनवरी को होने वाली विस्तृत सुनवाई पर टिका है। सरकार और न्यायपालिका के बीच का यह तालमेल भविष्य में शिक्षकों की योग्यता के मानकों को और स्पष्ट करेगा।

कोई टिप्पणी नहीं