यूपी कफ सिरप स्कैम: ₹312 करोड़ का काला कारोबार, नकली आधार कार्ड और फर्जीवाड़े से हिला सिस्टम
लखनऊ/वाराणसी (UP Prime News): उत्तर प्रदेश में नशीली कफ सिरप की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस और जांच एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नकली पहचान और फर्जी फर्मों का जाल
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड वाराणसी का शुभम जायसवाल बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि शुभम ने रांची (झारखंड) में अपना एक फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। इसी फर्जी पहचान के आधार पर उसने 'शैली ट्रेडर्स' नाम की फर्म बनाई और बैंक खाते खोले। इतना ही नहीं, ड्रग लाइसेंस हासिल करने के लिए सिंडिकेट ने अपने करीबियों के नाम पर फर्में खोलीं और अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) भी फर्जी लगाए।
₹312 करोड़ का चौंकाने वाला लेन-देन
ED की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। शुभम जायसवाल ने एबॉट फार्मास्युटिकल्स को 2.24 करोड़ कफ सिरप की बोतलें खरीदने के लिए ₹312 करोड़ का भुगतान किया था। अब जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि एक छोटे व्यापारी के पास इतनी बड़ी रकम कहाँ से आई। आशंका जताई जा रही है कि इस सिंडिकेट को किसी बड़े ड्रग माफिया का संरक्षण प्राप्त है।
वाराणसी से बांग्लादेश तक फैला नेटवर्क
तस्करी का यह जाल केवल यूपी तक सीमित नहीं था। आरोपी वाराणसी और अन्य जगहों से कफ सिरप की बड़ी खेप पूर्वोत्तर राज्यों (त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल) भेजते थे। वहाँ से इन बोतलों को अवैध तरीके से बांग्लादेश तस्करी किया जाता था। हाल ही में BSF के साउथ बंगाल फ्रंटियर द्वारा पकड़ी गई कफ सिरप और शुभम की फर्म के बैच नंबर एक ही पाए गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तस्करी की पुष्टि होती है।
सिंडिकेट के मददगार: सीए और बर्खास्त सिपाही
इस गोरखधंधे में शुभम को प्रोफेशनल मदद भी मिल रही थी। वाराणसी के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विष्णु अग्रवाल पर खातों में हेराफेरी करने और फर्जीवाड़े को अंजाम देने का आरोप है। इसके अलावा, धनबाद में फर्जी फर्में खुलवाने में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और वाराणसी के अमित सिंह ने भी मुख्य भूमिका निभाई।
भगोड़ों पर कसता शिकंजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT ने शुभम जायसवाल सहित सभी आरोपियों के खिलाफ 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंटरपोल की मदद से विदेश भाग चुके आरोपियों की तलाश की जाएगी। अब तक 12 आरोपियों के खिलाफ 'लुक आउट सर्कुलर' भी जारी किया जा चुका है।
न्यूज बैकग्राउंड (संक्षेप में)
भारत के कुछ राज्यों में कोडिन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है। इसकी मांग बांग्लादेश में बहुत अधिक है, जहाँ इसे ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। इसी मांग का फायदा उठाने के लिए यूपी के कुछ गिरोह कानूनी खामियों का फायदा उठाकर फर्जी कंपनियां बनाते हैं और स्टॉक को डायवर्ट कर तस्करी करते हैं।
जनता पर प्रभाव (Public Impact)
इस तरह के घोटालों का सीधा असर समाज के युवाओं पर पड़ता है, जो नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं। इसके अलावा, दवाओं की कालाबाजारी से मेडिकल सिस्टम की विश्वसनीयता कम होती है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस मिलना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा है, क्योंकि इसी तकनीक का इस्तेमाल अन्य अवैध गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है।
पत्रकार विश्लेषण (Analysis)
यह मामला केवल एक तस्करी का नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता का संकेत है। फर्जी आधार कार्ड पर बैंक खाते और ड्रग लाइसेंस मिलना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया कितनी कमजोर है। जब तक शैल कंपनियों और वित्तीय लेन-देन पर सख्त निगरानी नहीं होगी, ऐसे सिंडिकेट जड़ें जमाते रहेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं