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कोडीन सिरप तस्करी केस: बर्खास्त सिपाही की 20 करोड़ की कोठी पर ईडी का शिकंजा, पत्नी नहीं दे पाई पैसों का हिसाब

 उत्तर प्रदेश:

लखनऊ में कोडीन कफ सिरप तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। हाल ही में ईडी की एक टीम ने उत्तर प्रदेश पुलिस के बर्खास्त सिपाही और मामले के मुख्य आरोपी आलोक सिंह के लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचकर उसकी पत्नी से लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान लखनऊ में बनी करीब 20 करोड़ रुपये की आलीशान कोठी के निर्माण में लगी भारी-भरकम रकम के स्रोत पर था। सूत्रों के अनुसार, आलोक सिंह की पत्नी पूछताछ के दौरान इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं कि बिना किसी हाउसिंग लोन के इतनी महंगी संपत्ति कैसे तैयार की गई।

फोटो :- up prime news







जांच में यह भी सामने आया है कि आलोक सिंह ने पिछले तीन वर्षों के आयकर रिटर्न (ITR) में अपनी आय केवल कुछ लाख रुपये ही दिखाई है। लाखों की घोषित आय के बावजूद करोड़ों की अचल संपत्ति और लग्जरी सामान (जैसे प्राडा, गुच्ची के बैग और राडो की घड़ियाँ) मिलने से ईडी का संदेह और गहरा गया है। एजेंसी को आशंका है कि सिरप तस्करी के अवैध काले धन को संपत्ति निर्माण और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद करने की कोशिश की गई है। इस सिलसिले में आलोक सिंह को भी कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

यह पूरा मामला एक बड़े ड्रग सिंडिकेट से जुड़ा है, जिसका अनुमानित मूल्य 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। आरोपी फर्जी मेडिकल फर्मों और फर्जी बिलिंग के सहारे कानूनी रूप से मिलने वाली कोडीन सिरप को अवैध तरीके से बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और पड़ोसी देशों जैसे नेपाल व बांग्लादेश तक सप्लाई करते थे। आलोक सिंह का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है, उसे 2006 में सोने की लूट और 2019 में अन्य गंभीर आरोपों के चलते दो बार पुलिस सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। वर्तमान में यह मामला राजनीतिक तूल भी पकड़ रहा है क्योंकि आरोपी की कुछ तस्वीरें प्रमुख राजनेताओं के साथ सार्वजनिक हुई हैं।

खबर का बैकग्राउंड:

आलोक सिंह को दिसंबर 2025 में यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। वह फर्जी कंपनियों (जैसे शैली ट्रेडर्स) के जरिए कोडीन कफ सिरप की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का हिस्सा है। कोडीन एक नियंत्रित पदार्थ है जिसे नशे के तौर पर दुरुपयोग किए जाने के कारण भारत में इसके व्यापार पर कड़ी पाबंदी है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

दवाओं की तस्करी और नशे का काला कारोबार समाज के युवाओं को खोखला कर रहा है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से न केवल नशीले पदार्थों की अवैध सप्लाई चेन टूटती है, बल्कि भ्रष्टाचार के जरिए अवैध संपत्ति बनाने वालों के बीच कानून का डर भी पैदा होता है।

UP Prime News एनालिसिस:

सरकारी तंत्र का हिस्सा रहकर संगठित अपराध को संरक्षण देना बेहद गंभीर है। ईडी की वित्तीय जांच इस गिरोह की कमर तोड़ने में निर्णायक साबित हो सकती है।

लखनऊ | UP Prime News

Published: January 15, 2026 | 03:35 PM IST

By UP Prime News Desk



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