कानपुर: कारोबारी से 2.5 करोड़ की साइबर ठगी, कंबोडिया से जुड़े तार, 7 शातिर गिरफ्तार
कानपुर (उत्तर प्रदेश):
कानपुर कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह चकेरी इलाके के एक कारोबारी से 2.50 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में संलिप्त था। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी लोकल हैंडलर हैं, जबकि इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड कंबोडिया में बैठकर गिरोह का संचालन कर रहे थे। पुलिस आयुक्त रघूबिर लाल के अनुसार, ठगी की रकम को 96 अलग-अलग बैंक खातों में भेजा गया था, जिसे बाद में निकालकर डॉलर में बदला गया और हवाला के जरिए कंबोडिया भेजा गया।
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| साइबर फ्रॉड सांकेतिक फोटो :- up prime news |
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान ओसामा, मो. आरिफ, मो. यूसुफ, सावेज, मो. फैज (सभी बाबू पुरवा निवासी) और प्रयागराज निवासी अल हुमैद व मोनू बिलाल के रूप में हुई है। इनमें ओसामा मुख्य स्थानीय हैंडलर बताया जा रहा है, जो कंबोडिया में बैठे आकाओं के सीधे संपर्क में था। पुलिस ने इनके पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए 12 बैंक खातों की जानकारी भी बरामद की है। यह गिरोह लोगों को निवेश के नाम पर और ब्लैकमेल करके फंसाता था।
ठगी का शिकार हुए चकेरी के सफीपुर निवासी ज्वेलरी बॉक्स निर्माता राहुल केसरवानी ने बताया कि उन्हें मई 2025 में फेसबुक पर एक युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप और एक ट्रेडिंग वेबसाइट से जोड़ा गया। शुरुआत में 10 लाख के निवेश पर 26 लाख का मुनाफा दिखाया गया। जब उन्होंने और पैसा नहीं दिया, तो एक शख्स ने खुद को 'कर्नल' बताकर वीडियो कॉल किया और पुलिस आयुक्त का दोस्त होने का धौंस जमाकर धमकाया। डर की वजह से पीड़ित ने 14 जून 2025 से 9 दिसंबर 2025 के बीच करीब ढाई करोड़ रुपये जमा कर दिए।
खबर का बैकग्राउंड:
यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का है। पीड़ित को पहले मुनाफे का लालच दिया गया, फिर वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दीधारी द्वारा धमकाया गया। 17 दिसंबर को चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।
पब्लिक इम्पैक्ट:
यह घटना आम जनता के लिए एक बड़ी चेतावनी है। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करना और बिना जांच-पड़ताल के किसी ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट पर मोटा निवेश करना घातक साबित हो सकता है। साथ ही, वीडियो कॉल पर पुलिस या अधिकारी बनकर धमकाने वाले 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों में डरने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
UP Prime News एनालिसिस:
पुलिस ने लोकल हैंडलर्स को पकड़कर सराहनीय काम किया है, लेकिन मुख्य चुनौती विदेशों (कंबोडिया, चीन, थाईलैंड) में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचना है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन सरगनाओं पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक लोकल गुर्गों के जरिए ठगी का यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है।
कानपुर | UP Prime News
Published: January 01, 2026 | 06:46 AM IST
By UP Prime News Desk

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