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कासगंज: मां ने समधी संग मिलकर की बेटी की हत्या, अवैध संबंधों के राज को दफनाने के लिए दामाद को फंसाया

 कासगंज (उत्तर प्रदेश):

कासगंज पुलिस ने एक ऐसे अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाई है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। यहां एक मां ने अपने ही समधी (बेटी के ससुर) के साथ मिलकर अपनी विवाहिता बेटी को मौत के घाट उतार दिया। मामला अवैध संबंधों का है, जिसका विरोध करने पर बेटी शबनूर की हत्या की गई। हत्या के बाद खुद को बचाने के लिए आरोपी मां यासमीन ने एक शातिराना चाल चली और अपने ही दामाद और उसके परिवार पर दहेज हत्या का झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया। पुलिस की गहन जांच के बाद अब असली कातिल सलाखों के पीछे हैं और बेगुनाह दामाद को रिहा कर दिया गया है।

मां और समधी आरोपी गिरफ्तार :- up prime news








पुलिस अधीक्षक (SP) अंकिता शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मृतक शबनूर की मां यासमीन (निवासी उझानी, बदायूं) और शबनूर के ससुर रहीस अहमद के बीच अवैध संबंध थे। शबनूर को इस बात की भनक लग गई थी और उसने अपनी मां को धमकी दी थी कि वह यह बात अपने पति जाविर को बता देगी। बदनामी के डर और रास्ते का कांटा हटाने के लिए यासमीन ने रहीस अहमद के साथ मिलकर बेटी की हत्या की साजिश रची।

घटनाक्रम के मुताबिक, आरोपियों ने शबनूर को सुनगढ़ी क्षेत्र के नगला खमानी बंबा के पास बुलाया और वहां उसकी हत्या कर शव को सड़क किनारे फेंक दिया। इसके बाद मां यासमीन ने पुलिस को गुमराह करते हुए दामाद जाविर और ससुराल वालों पर दहेज के लिए हत्या करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने जब सर्विलांस और बयानों के आधार पर जांच की, तो कड़ियां जुड़ती गईं और मां का यह खौफनाक चेहरा सामने आया।

खबर का बैकग्राउंड:
बीते 26 दिसंबर को सुनगढ़ी थाना क्षेत्र में शबनूर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। शुरुआत में इसे दहेज हत्या मानकर पुलिस ने मृतका के पति को हिरासत में लिया था। हालांकि, सीओ सहावर शाहिदा नसरीन और एसएचओ पवन कुमार की जांच में जब कॉल डिटेल्स और लोकेशन खंगाले गए, तो मां और समधी की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद कड़ाई से पूछताछ में उन्होंने जुर्म कबूल कर लिया।


पब्लिक इम्पैक्ट:
यह घटना समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और रिश्तों की मर्यादा तार-तार होने का प्रमाण है। इस खुलासे से जहां एक निर्दोष परिवार (ससुराल पक्ष) जेल जाने और जीवन बर्बाद होने से बच गया, वहीं यह समाज को सतर्क करता है कि हर बार जो दिखता है, वह सच नहीं होता। झूठे मुकदमों से पुलिस का समय और निर्दोष का जीवन कैसे प्रभावित होता है, यह मामला इसका बड़ा उदाहरण है।


UP Prime News एनालिसिस:
कासगंज पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है क्योंकि अक्सर दहेज हत्या के मामलों में भावनाएं हावी रहती हैं, लेकिन यहां वैज्ञानिक साक्ष्यों ने एक निर्दोष को सजा से बचा लिया। यह मामला यह भी दर्शाता है कि अवैध संबंधों के चलते करीबी रिश्ते किस हद तक घातक हो सकते हैं।


कासगंज | UP Prime News
Published: 05 Jan 2026 | 04:27 PM IST
By UP Prime News Desk












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