मेरठ: कपसाड़ कांड के आरोपी पारस सोम का नाबालिग होने का दावा, कोर्ट में पेश की 10वीं की मार्कशीट
मेरठ (उत्तर प्रदेश):
मेरठ के चर्चित कपसाड़ कांड में एक नया मोड़ सामने आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी पारस सोम के वकील और परिजनों ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर दावा किया है कि घटना के समय पारस नाबालिग था। वर्तमान में पारस सोम चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद है। बचाव पक्ष ने अब इस मामले को किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) में स्थानांतरित करने की मांग की है।
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| फोटो : up prime news |
पारस के पिता योगेश सोम ने वकीलों के एक पैनल के माध्यम से एससी-एसटी कोर्ट में ठोस दस्तावेज जमा कराए हैं। इन दस्तावेजों में पारस की हाईस्कूल की मार्कशीट, आदर्श इंटर कॉलेज कपसाड़ का 2022 का आईकार्ड और उसका आधार कार्ड शामिल है। इन प्रमाणों के अनुसार, पारस सोम की जन्मतिथि 11 मई 2008 दर्ज है और उसने साल 2024 में ही 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस आधार पर परिजनों का दावा है कि पारस की उम्र अभी 18 साल से कम है।
जज असलम सिद्दीकी के समक्ष दिए गए इस आवेदन पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख तय की है। यदि अदालत पारस को नाबालिग मान लेती है, तो उसे जेल के बजाय बाल संप्रेक्षण गृह भेजा जाएगा। जुवेनाइल एक्ट के तहत, दोषी पाए जाने पर भी अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। वहीं दूसरी ओर, पारस के निजी दस्तावेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।
खबर का बैकग्राउंड:
मेरठ के कपसाड़ गांव में सुनीता नाम की महिला की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण का मामला सामने आया था। इस गंभीर अपराध में पारस सोम को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिसके बाद अब उसकी उम्र को लेकर कानूनी बहस शुरू हुई है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस तरह के गंभीर मामलों में आरोपी के नाबालिग होने के दावों से जनता के बीच कानूनी प्रक्रियाओं और जुवेनाइल एक्ट के प्रावधानों को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जघन्य अपराधों में उम्र का निर्धारण न्याय की दिशा को किस प्रकार बदल सकता है।
UP Prime News एनालिसिस:
अपराधिक मामलों में आरोपी की आयु का निर्धारण एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। यदि दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार आरोपी को सुधार का अवसर मिलता है, लेकिन पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की परिभाषा बदल जाती है।
मेरठ | UP Prime News
Published: 15 Jan 2026 | 07:04 AM IST
By UP Prime News Desk

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