अधिवक्ताओं का पक्ष रखते हुए संजीव कुमार शुक्ला ने बताया कि कचहरी में उनके बैठने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पास कुर्सी रखने या कोट टांगने तक की जगह नहीं है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन सफाई कर यहाँ बैठने की व्यवस्था बनानी पड़ी। दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के एक गुट ने इस कृत्य की निंदा की है। उनका कहना है कि रास्ता रोकना और आत्महत्या की धमकी देना वकालत के पेशे की गरिमा के खिलाफ है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
वर्तमान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और भारी पुलिस बल मौके पर तैनात है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जिला जज और बार काउंसिल को भेजा जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले से ही अवैध कब्जों और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त वकीलों की सूची तैयार करवा रहा है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन वकीलों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
खबर का बैकग्राउंड:
कचहरी में पिछले कुछ दिनों से शीतकालीन अवकाश चल रहा था, जिसका फायदा उठाकर यह निर्माण कार्य किया गया। गुरुवार को जब अदालतें खुलीं, तो आम लोगों और अन्य वकीलों ने मुख्य रास्ते को बाधित पाया। कोर्ट परिसर में स्थान की कमी को लेकर वकीलों और प्रशासन के बीच पहले भी कई बार खींचतान हो चुकी है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
मुख्य रास्ते पर अवैध निर्माण और हंगामे के कारण कचहरी आने वाले फरियादियों और आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। न्याय के मंदिर में इस तरह का गतिरोध अदालती कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करता है और आम नागरिकों के मन में कानून व्यवस्था के प्रति असुरक्षा का भाव पैदा करता है।
UP Prime News एनालिसिस:
बुनियादी सुविधाओं की मांग जायज हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक रास्ते को बाधित करना और आत्मघाती कदम की धमकी देना कानूनी प्रक्रिया के विरुद्ध है। प्रशासन को इस मुद्दे का समाधान संवाद के जरिए निकालना चाहिए ताकि कोर्ट की गरिमा बनी रहे।
मेरठ | UP Prime News
Published: January 01, 2026 | 11:36 PM IST
By UP Prime News Desk
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