नोएडा: सेकंड हैंड कार खरीदने वाले हो जाएं सावधान! बेचकर दोबारा चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, डीलर समेत 3 गिरफ्तार
नोएडा (उत्तर प्रदेश):
नोएडा पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सेकंड हैंड कार खरीदने वाले ग्राहकों को अनोखे तरीके से चूना लगा रहा था। यह गिरोह पहले लोगों को सस्ते दाम पर बैंक लोन या फाइनेंस विवाद वाली गाड़ियां बेचता था और फिर कुछ दिनों बाद उन्हीं गाड़ियों को चोरी कर लेता था। थाना सेक्टर-113 की पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के सरगना, जो कि खुद एक कार डीलर है, समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से चोरी की गई एक टाटा नेक्सॉन कार और अन्य तकनीकी उपकरण भी बरामद किए हैं।
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| तीन आरोपियों गिरफ्तार फोटो :-up prime news |
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी डीलर गाड़ियों में पहले से ही जीपीएस (GPS) ट्रैकर छिपाकर लगा देता था और अपने पास उस गाड़ी की एक डुप्लीकेट चाबी रख लेता था। ग्राहक को जब गाड़ी बेची जाती थी, तो उसे बैंक लोन डिस्प्यूट या फाइनेंस का मामला बताकर बहुत ही कम दाम ऑफर किए जाते थे। इसी वजह से गाड़ी के कागजात (RC) भी तुरंत ट्रांसफर नहीं किए जाते थे। ग्राहक को गाड़ी सौंपने के बाद, आरोपी जीपीएस के जरिए लोकेशन ट्रैक करते थे और मौका मिलते ही डुप्लीकेट चाबी से गाड़ी चुराकर फरार हो जाते थे।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक पीड़ित ने अपनी कार चोरी होने की शिकायत सेक्टर-113 थाने में दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सर्फाबाद चौकी इंचार्ज विशाल गुप्ता के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच के बाद इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया। पूछताछ में आरोपियों ने कबूला है कि वे अब तक कई लोगों के साथ इसी तरह की ठगी को अंजाम दे चुके हैं।
खबर का बैकग्राउंड:
दिल्ली-एनसीआर में सेकंड हैंड कारों का बड़ा बाजार है, जहां अक्सर लोग सस्ती गाड़ियों के लालच में फंस जाते हैं। इस मामले में पुलिस को शिकायत मिली थी कि गाड़ी खरीदने के कुछ ही दिन बाद घर के बाहर से चोरी हो गई। जांच में यह सामान्य चोरी नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश निकली, जिसका मास्टरमाइंड वह डीलर ही था जिसने गाड़ी बेची थी।
पब्लिक इम्पैक्ट:
यह खबर उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो पुरानी गाड़ियां खरीदने की योजना बना रहे हैं। आम जनता को यह समझना होगा कि बिना पेपर ट्रांसफर (NOC और RC) के गाड़ी खरीदना सुरक्षित नहीं है। यह घटना सिखाती है कि सेकंड हैंड गाड़ी लेते समय उसकी पूरी तकनीकी जांच कराएं, संभव हो तो लॉक बदलवा दें और डीलर की विश्वसनीयता (Credibility) की पुष्टि जरूर करें। केवल सस्ती कीमत देखकर सौदा करना भारी पड़ सकता है।
UP Prime News एनालिसिस:
यह गिरोह ऑटोमोबाइल बाजार में विश्वास के संकट को उजागर करता है। जिस तरह से तकनीकी उपकरणों (जीपीएस) का इस्तेमाल अपराध के लिए किया गया, वह चिंताजनक है। पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह पुरानी गाड़ियों की खरीद-फरोख्त में सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
नोएडा | UP Prime News
Published: January 03, 2026 | 11:44 PM IST
By UP Prime News Desk

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