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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आशुतोष ब्रह्मचारी के गंभीर आरोप: बच्चों के शोषण और करोड़ों के गबन का दावा, प्रयागराज में मची खलबली

 उत्तर प्रदेश (प्रयागराज):

संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित एक प्रेस वार्ता ने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने ज्योतिष पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने मांग की है कि प्रशासन इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को तत्काल गिरफ्तार करे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए पुख्ता सबूत और मेडिकल रिपोर्ट मौजूद हैं, जो इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे सकते हैं।

  आशुतोष ब्रह्मचारी और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद फोटो :- UP prime news








प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने विस्तार से बताया कि माघ मेले के दौरान 17 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों का यौन उत्पीड़न किया गया था। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित बच्चों ने अदालत में धारा 164 के तहत अपने कलमबंद बयान भी दर्ज कराए हैं। ब्रह्मचारी के अनुसार, बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट में उनके साथ हुए दुर्व्यवहार की पुष्टि हुई है। इस कथित अपराध में उन्होंने मठ के सीईओ प्रकाश उपाध्याय, शिष्य स्वामी मुकुंदानंद और अरविंद को भी मुख्य सहयोगी बताया है। इसके साथ ही 'पूर्णिमा' नाम की एक महिला पर भी इस षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने केवल व्यक्तिगत आचरण पर ही नहीं, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं पर भी कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आश्रमों में करोड़ों रुपये का गबन किया गया है और 'विवाह' के नाम पर बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है। उनके मुताबिक, सनातन धर्म के नाम पर चंदा लेने वाले इन लोगों ने धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने यहां तक कहा कि इन कार्यों के कारण उन्हें "गंगा मां का श्राप" लगा है, जिसके चलते वे गंगा स्नान तक करने में समर्थ नहीं हो पा रहे हैं।

राजनीतिक एंगल को जोड़ते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बड़े नेताओं को भी इस विवाद में घसीटा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और राहुल गांधी जैसे नेता उनके पीछे पड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के कई बड़े नेता रात के समय आश्रम में रुकते थे और बच्चों के उत्पीड़न की घटनाओं में उनकी संलिप्तता की ओर भी इशारा किया। उन्होंने एक वर्तमान डिप्टी सीएम से हुई बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उनका धरना समाप्त करने के लिए भी कहा गया था।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पदवी पर सवाल उठाते हुए ब्रह्मचारी ने कहा कि उन्होंने शंकराचार्य बनने की जल्दबाजी में अपने दिवंगत गुरु का स्थान तुरंत ले लिया, जबकि उनकी इस उपाधि पर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) की रोक लगी हुई है। उन्होंने इसे नियमों और धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन करार दिया। खुद पर लगे आरोपों की सफाई देते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्वीकार किया कि उन्हें अतीत में हिस्ट्रीशीटर बनाया गया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल हिंदुओं की लड़ाई लड़ने के कारण हुआ था। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने उन्हें उन सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है।

प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने अपनी जान का खतरा भी जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उनकी हत्या करवा सकते हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कुछ पुरानी तस्वीरें दिखाते हुए यह भी दावा किया कि पहले आरोपी पक्ष के लोग उनके काफी करीब थे और उनसे गले मिलते थे, लेकिन अब सच्चाई सामने लाने के कारण उनके बीच दूरियां आ गई हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने प्रयागराज प्रशासन और संत समाज के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनकी जांच आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती होगी।

खबर का बैकग्राउंड:

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वयं को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया था, जिस पर अन्य संत समूहों और कानूनी रूप से आपत्तियां जताई गई थीं। आशुतोष ब्रह्मचारी इसी विवाद के बीच अब आपराधिक और वित्तीय आरोपों के साथ सामने आए हैं।

पब्लिक इम्पैक्ट:

धर्मगुरुओं पर लगे इतने गंभीर आरोपों से आम जनता और श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा धक्का पहुंचता है। बच्चों के शोषण जैसे संवेदनशील मुद्दे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। राजनीतिक दलों का नाम आने से यह मुद्दा केवल धार्मिक न रहकर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है, जिससे चुनावी माहौल भी प्रभावित होने की संभावना है।

UP Prime News एनालिसिस:

इस पूरे प्रकरण में लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और इनकी सत्यता की जांच केवल एक निष्पक्ष पुलिसिया और न्यायिक जांच के माध्यम से ही संभव है। जब तक अदालत या जांच एजेंसियां किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचतीं, तब तक इसे संत समाज के भीतर चल रहे वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रयागराज | UP Prime News

Published: February 25, 2026 | 09:21 PM IST

By UP Prime News Desk




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