कानपुर: 'मैं ठाकुर हूं' वाले वायरल वीडियो पर बैंक कर्मी आस्था सिंह का बड़ा खुलासा, बताया पूरा सच
कानपुर उत्तर प्रदेश:
कानपुर के पनकी स्थित एचडीएफसी (HDFC) बैंक में तैनात रिलेशनशिप मैनेजर आस्था सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह "मैं ठाकुर हूं, बदमाशी मत करना" कहती नजर आ रही हैं। इस मामले पर अब खुद आस्था सिंह ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है। आस्था का आरोप है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 45 सेकंड का वीडियो अधूरा है और इसे उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर एक खास एंगल से काटकर वायरल किया गया है। उन्होंने कहा कि पूरी घटना बैंक के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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| आस्था सिंह फोटो : up prime news |
आस्था सिंह के अनुसार, यह घटना 6 जनवरी की है जब बैंक की पूर्व कर्मचारी रितु त्रिपाठी अपने पति ऋषि त्रिपाठी के साथ इस्तीफा देने और फाइनल सेटलमेंट के लिए बैंक आई थीं। आस्था का दावा है कि रितु के पति ऋषि त्रिपाठी ने उनके साथ बदतमीजी की और उनकी जाति पूछते हुए उन्हें नौकरी से निकलवाने की धमकी दी। आस्था ने बताया कि उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और जब उन्हें अपनी सुरक्षा का खतरा महसूस हुआ, तब बचाव में उन्होंने अपनी जाति का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, विवाद की असली जड़ उसी दिन सुबह रितु की बहन के साथ वॉशरूम में कपड़े फंसने को लेकर हुई मामूली कहासुनी थी, जिसका बदला लेने के लिए दोपहर में यह हंगामा किया गया।
आस्था सिंह ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने घटना वाले दिन ही बैंक के आधिकारिक ईमेल पर पूरी जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज करा दी थी। उनका आरोप है कि जब रितु त्रिपाठी का फाइनल सेटलमेंट पूरा हो गया, तब जानबूझकर इस पुराने वीडियो को वायरल किया गया ताकि इसे जातिगत रंग दिया जा सके। आस्था का कहना है कि यह मामला जातिवाद का नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर एक महिला कर्मचारी की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही है।
खबर का बैकग्राउंड:
हाल ही में कानपुर के एक निजी बैंक का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक महिला कर्मचारी गुस्से में अपनी जाति का हवाला देते हुए सामने वाले को चेतावनी दे रही थी। इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर जातिवाद और सत्ता के रसूख को लेकर नई बहस छिड़ गई थी, जिसके बाद अब महिला कर्मचारी ने अपनी सफाई पेश की है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस तरह के मामलों से समाज में सोशल मीडिया ट्रायल की प्रवृत्ति बढ़ती है। बिना पूरा सच जाने किसी को दोषी मान लेना गलत है। यह घटना कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा और आपसी व्यवहार के महत्व को भी रेखांकित करती है, साथ ही यह भी बताती है कि किसी भी वायरल वीडियो के पीछे दूसरा पक्ष भी हो सकता है।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला कार्यस्थल पर अनुशासन और व्यक्तिगत विवाद के बीच का है, जिसे सोशल मीडिया पर जातिगत मोड़ दे दिया गया। इस प्रकरण में बैंक प्रशासन और पुलिस की विस्तृत जांच ही सच सामने ला सकती है।
उत्तर प्रदेश | UP Prime News
Published: 10 फरवरी 2026 | 10:52 AM IST
By UP Prime News Desk

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