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अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रचा इतिहास: राम मंदिर के दूसरे तल पर 'श्री राम यंत्र' की स्थापना, भव्य अनुष्ठान के साथ रामलला के दरबार में लगाई हाजिरी

 अयोध्या (उत्तर प्रदेश):

धर्मनगरी अयोध्या आज एक बार फिर ऐतिहासिक गौरव की साक्षी बनी। देश की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार, 19 मार्च 2026 को रामनगरी पहुंचीं, जहाँ उन्होंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर 'श्री राम यंत्र' की विधि-विधान से स्थापना की। इस पावन अवसर पर राष्ट्रपति ने राम दरबार के दर्शन किए और रामलला की आरती उतारकर देश की सुख-समृद्धि की कामना की। राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक समरसता के संदेश के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अयोध्या राम मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा श्री राम यंत्र की स्थापना
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या यात्रा फोटो : UP prime news









राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह लगभग 11 बजे विशेष विमान से अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरीं। हवाई अड्डे पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुके भेंट कर उनका पारंपरिक और भव्य स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति का काफिला कड़ी सुरक्षा के बीच सीधे श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के लिए रवाना हुआ। उन्होंने 'आद्य शंकराचार्य द्वार' (गेट नंबर 11) से मंदिर परिसर में प्रवेश किया। मंदिर के मुख्य पुजारियों और वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत किया।

तय कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 11:55 बजे के 'अभिजीत मुहूर्त' में राष्ट्रपति ने मंदिर के दूसरे तल पर स्थित गर्भगृह में 'श्री राम यंत्र' का पूजन किया और उसकी स्थापना की। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कई वरिष्ठ संत और पदाधिकारी मौजूद रहे। वैदिक आचार्यों ने लगभग आधे घंटे तक चले इस अनुष्ठान को संपन्न कराया। इसके बाद राष्ट्रपति ने प्रथम तल पर विराजमान रामलला के दर्शन किए और पूरी श्रद्धा के साथ आरती उतारी।

राष्ट्रपति के इस दौरे को 'सामाजिक समरसता' के बड़े प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। रामलला के दर्शन के बाद उन्होंने नवनिर्मित 'सप्तमंडपम' में जाकर महर्षि वाल्मीकि, माता शबरी और निषादराज के मंदिरों के दर्शन किए। समाज के वंचित वर्गों के आराध्यों के मंदिरों में राष्ट्रपति की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि श्री राम का मंदिर समावेशी भारतीय संस्कृति का केंद्र है। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण में रात-दिन जुटे रहे श्रमिकों से भी संवाद किया और उनके योगदान की सराहना की। इस दौरान केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी (अम्मा) भी अपने लगभग एक हजार भक्तों के साथ अयोध्या पहुंची थीं और इस समारोह में शामिल हुईं।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से अयोध्या को आज एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया था। पूरे जिले को 13 जोन और 37 सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की गई। लगभग 3000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाला, जिनमें 18 एसपी/एसएसपी स्तर के अधिकारी, 33 सीओ, 130 निरीक्षक और 400 उप-निरीक्षक तैनात रहे। महिला सुरक्षा के लिए 50 महिला उप-निरीक्षक और भारी संख्या में महिला आरक्षियों की ड्यूटी लगाई गई थी। 18 मार्च की रात से ही अयोध्या में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था और यह यातायात डायवर्जन 19 मार्च की शाम 5 बजे तक प्रभावी रहा।

राष्ट्रपति के आगमन के दौरान आम श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए ट्रस्ट ने विशेष व्यवस्था की थी। राष्ट्रपति की मौजूदगी के दौरान सुरक्षा कारणों से दर्शन कुछ समय के लिए रोके गए थे, लेकिन इसकी भरपाई के लिए मंदिर के कपाट देर रात तक खुले रखने का निर्णय लिया गया, ताकि दूर-दराज से आए श्रद्धालु दर्शन कर सकें।

खबर का बैकग्राउंड:

अयोध्या का श्री राम जन्मभूमि मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र है। मंदिर निर्माण के लिए 15 जनवरी 2021 से 27 फरवरी 2021 तक राष्ट्रव्यापी निधि समर्पण अभियान चलाया गया था, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 5 लाख 100 रुपये का पहला चेक देकर शुरुआत की थी। इस अभियान में देश भर से 2500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वेच्छा से दान की गई। आज उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंदिर के दूसरे तल पर यंत्र स्थापना कर एक नया अध्याय जोड़ा है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

राष्ट्रपति के इस दौरे से अयोध्या में धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की संभावना है। मंदिर के दूसरे तल पर कार्य पूरा होने और यंत्र स्थापना से श्रद्धालुओं में उत्साह है। प्रशासन द्वारा की गई सख्त सुरक्षा और ट्रैफिक डायवर्जन से स्थानीय लोगों को थोड़ी परेशानी जरूर हुई, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से जनता ने भी सहयोग किया। सामाजिक समरसता के मंदिरों (शबरी, निषादराज) में राष्ट्रपति के जाने से समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक संदेश गया है।

UP Prime News एनालिसिस:

राष्ट्रपति का अयोध्या दौरा धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ एक मजबूत सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश है। सर्वोच्च पद पर बैठी एक महिला का रामलला के दरबार में मत्था टेकना और वंचित समाज के प्रतीकों का सम्मान करना भारतीय लोकतंत्र और संस्कृति की समावेशी तस्वीर पेश करता है।

अयोध्या | UP Prime News

Published: March 19, 2026 | 12:09 PM IST

By UP Prime News Desk
















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