सावधान: सुबह एक साथ 3-4 गिलास पानी पीना पड़ सकता है आंखों पर भारी, बढ़ सकता है ग्लूकोमा का खतरा
उत्तर प्रदेश (कानपुर):
अक्सर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग सुबह उठते ही खाली पेट अधिक मात्रा में पानी पीने को एक अच्छी आदत मानते हैं। सामान्य धारणा यही है कि इससे पेट साफ रहता है और शरीर हाइड्रेटेड रहता है। लेकिन हाल ही में कानपुर स्थित जीएसवीएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज से आए एक चौंकाने वाले शोध और डॉक्टरों की चेतावनी ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ अत्यधिक पानी पीना आपकी आंखों की रोशनी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो ग्लूकोमा (काला मोतिया) से पीड़ित हैं या जिनमें इसके शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं।
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| आंखों की सेहत और पानी पीने का सही तरीका सांकेतिक फोटो |
वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक' के दौरान कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने मरीजों पर एक विशेष 'वाटर ड्रिंकिंग टेस्ट' किया। इस जांच के दौरान 40 से 60 साल की उम्र के मरीजों में चौंकाने वाले परिणाम देखे गए। शोध में शामिल लगभग 25 प्रतिशत मरीजों की आंखों का दबाव (Intraocular Pressure) अचानक बढ़ा हुआ पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, एक स्वस्थ आंख का सामान्य दबाव 10 से 20 मिलीमीटर मरकरी (mmHg) के बीच होना चाहिए, लेकिन एक साथ ज्यादा पानी पीने वाले कई मरीजों में यह स्तर काफी ऊपर चला गया, जो सीधे तौर पर ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुँचा सकता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ और आईएमए (IMA) सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हमारी आंखों के भीतर एक तरल पदार्थ निरंतर बनता और बाहर निकलता रहता है, जिससे आंख का आंतरिक दबाव संतुलित रहता है। जब कोई व्यक्ति अचानक 3 से 4 गिलास पानी एक साथ पी लेता है, तो रक्त और शरीर में तरल पदार्थ का स्तर तेजी से बढ़ता है। इसके कारण आंख के अंदर द्रव (Aqueous Humor) अधिक बनने लगता है या उसके बाहर निकलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इस स्थिति में इंट्राऑक्युलर प्रेशर बढ़ जाता है, जो धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को कमजोर कर देता है और अंततः दृष्टिहीनता का कारण बन सकता है।
डॉक्टरों ने केवल पानी ही नहीं, बल्कि कैफीन के अत्यधिक सेवन को लेकर भी चेतावनी दी है। ऑप्थेल्मिक सोसाइटी की पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. सोनिया दमेले के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है। इससे आंखों के अंदर का दबाव अस्थायी रूप से बढ़ जाता है। जिन लोगों की आंखों की नसें पहले से कमजोर हैं, उनके लिए यह स्थिति काफी जोखिम भरी हो सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पानी पीने की आदत को किस्तों में बांटना चाहिए और एक साथ बहुत ज्यादा तरल पदार्थ लेने से बचना चाहिए। इसके बजाय, हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी का सेवन ग्लूकोमा के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।
खबर का बैकग्राउंड:
यह जानकारी 'वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक' के उपलक्ष्य में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित जांच शिविर और शोध के बाद साझा की गई है। ग्लूकोमा दुनिया भर में अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, जिसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर तब तक महसूस नहीं होते जब तक दृष्टि को काफी नुकसान न पहुँच जाए। इसी संदर्भ में 'वाटर ड्रिंकिंग टेस्ट' के जरिए यह देखा गया कि जीवनशैली की छोटी-सी दिखने वाली आदतें कैसे आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस खबर का सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा जो 'आयुर्वेद' या 'नेचुरल हीलिंग' के नाम पर सुबह उठकर 1 से 2 लीटर पानी एक साथ पी जाते हैं। आम जनता को अब अपनी इस आदत को चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर बदलने की जरूरत है। विशेषकर 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए यह जानना जरूरी है कि हर अच्छी दिखने वाली आदत हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होती। इससे लोगों में आंखों की नियमित जांच और ग्लूकोमा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
UP Prime News एनालिसिस:
यह रिपोर्ट किसी पुरानी परंपरा को गलत बताने के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सावधानी बरतने के लिए है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी है, लेकिन वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और शारीरिक क्षमता के तालमेल के साथ होनी चाहिए।
कानपुर | UP Prime News
Published: March 16, 2026 | 08:39 AM IST
By UP Prime News Desk

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