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सीएम योगी का गोरखपुर में होली पर 'नया अवतार', नरसिंह शोभायात्रा में शामिल होकर दिया राष्ट्रवाद और समरसता का संदेश

 गोरखपुर (उत्तर प्रदेश):

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर में बेहद उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला, जहां वे काले चश्मे पहनकर जनता के बीच पहुंचे और उन पर अबीर-गुलाल व फूलों की जमकर वर्षा हुई। गोरखनाथ मंदिर से शुरू हुआ यह उत्सव धीरे-धीरे पूरे शहर में फैल गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु और आम नागरिक शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस दौरान न केवल परंपराओं का निर्वहन किया, बल्कि प्रदेशवासियों को सामाजिक समरसता और विकसित भारत के संकल्प का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में चश्मा पहनकर होली मनाते हुए
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में चश्मा पहनकर होली मनाते हुए














होली के इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या पूरी तरह पारंपरिक और आध्यात्मिक रही। सुबह-सुबह उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और उसके बाद मंदिर परिसर में स्थित गौशाला में जाकर गायों के साथ समय बिताया। इसके पश्चात, मुख्यमंत्री ने मंदिर के प्रधान पुजारी और अन्य साधु-संतों के साथ 'सम्मत की राख' (होलिका दहन की भस्म) से तिलक लगाकर रंगोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। मंदिर परिसर में फाग गीतों की गूंज के बीच मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को होली की बधाई दी। इसके बाद वे जनता के बीच पहुंचे, जहां लोगों ने उनका स्वागत 'जोश और रंगों' के साथ किया। काले चश्मे लगाए मुख्यमंत्री पर जब गुलाब के फूलों और रंगों की बारिश हुई, तो वहां मौजूद जनसैलाब का उत्साह देखते ही बन रहा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि होली का यह पर्व हमारी हजारों वर्षों की विरासत का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो परंपराएं हमें सौंपी हैं, वर्तमान पीढ़ी उन्हें पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने 'विकसित भारत' का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरा देश सुरक्षा, शांति और सौहार्द के भाव के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने समाज में व्याप्त किसी भी प्रकार के मनमुटाव और बैर को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि जब समाज में शांति और विश्वास होता है, तभी उत्सव का आनंद दोगुना हो जाता है। उनके अनुसार, यह पर्व नए भारत के दर्शन कराता है जो अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।

उत्सव के दूसरे चरण में, मुख्यमंत्री घंटाघर से निकलने वाली ऐतिहासिक 'भगवान नरसिंह शोभायात्रा' में सम्मिलित हुए। इस शोभायात्रा का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने की थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि नानाजी देशमुख ने इस अभियान की शुरुआत समाज को एकजुट करने और ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने के उद्देश्य से की थी। बाद में, गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के निर्देशन में यह शोभायात्रा पीठ का अभिन्न हिस्सा बन गई। आज यह आयोजन गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है, जो हिंदू समाज की एकता और भाईचारे का संदेश पूरी दुनिया को देता है।

खबर का बैकग्राउंड:

गोरखपुर में भगवान नरसिंह की शोभायात्रा का आयोजन दशकों से किया जा रहा है। इसकी नींव नानाजी देशमुख ने रखी थी ताकि समाज के हर तबके को एक मंच पर लाया जा सके। गोरक्षपीठ ने इस परंपरा को संरक्षण दिया और वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर साल स्वयं इस रथ पर सवार होकर जनता के साथ होली खेलते हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता का एक बड़ा केंद्र माना जाता है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

मुख्यमंत्री के इस सार्वजनिक उत्सव में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर सामाजिक एकता को बल मिलता है। प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित इस कार्यक्रम से आम जनता में सुरक्षा और विश्वास का भाव जागृत होता है। इसके अलावा, पारंपरिक उत्सवों को मुख्यमंत्री स्तर पर मिलने वाले प्रोत्साहन से युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासतों के प्रति अधिक जागरूक और गौरवान्वित महसूस करती है।

UP Prime News एनालिसिस:

यह आयोजन मुख्यमंत्री की उस छवि को पुख्ता करता है जिसमें वे अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समान महत्व देते हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से परे, यह कार्यक्रम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूती प्रदान करने का एक प्रभावी जरिया है।

गोरखपुर | UP Prime News

Published: March 04, 2026 | 11:43 AM IST

By UP Prime News Desk







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