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लोकसभा-विधानसभा में पिछड़ों को मिले अलग आरक्षण, सांसद चंद्रशेखर आजाद ने लखनऊ से फूंका 2027 का चुनावी बिगुल

 उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा गर्मा गया है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने राजधानी लखनऊ में आयोजित 'पिछड़ा वर्ग अधिकार सम्मेलन' के दौरान एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। चंद्रशेखर आजाद ने दो-टूक शब्दों में मांग की है कि अब समय आ गया है जब लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जाए। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक नीति निर्धारण करने वाले सदनों में पिछड़ों की संख्या उनकी आबादी के अनुपात में सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक वास्तविक सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है।

चंद्रशेखर आजाद लखनऊ पिछड़ा वर्ग अधिकार सम्मेलन
चंद्रशेखर आजाद फोटो : U P prime news






सम्मेलन को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने न केवल मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की बात की, बल्कि 'अति पिछड़ी' जातियों के लिए एक नई मांग भी सामने रख दी। उन्होंने कहा कि पिछड़ों को मिलने वाले वर्तमान आरक्षण के अलावा अति पिछड़ी जातियों के लिए 15 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए। आजाद का मानना है कि आरक्षण का लाभ अभी भी उन जातियों तक नहीं पहुंच पा रहा है जो विकास की दौड़ में सबसे पीछे छूट गई हैं। उन्होंने सरकारी सेवाओं में दलितों और पिछड़ों को पदोन्नति (प्रोमोशन) में कोटा देने की वकालत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों और यूजीसी जैसे निकायों में पिछड़ों की भागीदारी लगातार कम हो रही है, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है।

चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार 'पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक' (PDA) की बढ़ती एकजुटता से डरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि इसी डर के कारण सरकार उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने से कतरा रही है। उन्होंने जनता को आगाह किया कि केवल 'पांच किलो राशन' के नाम पर वोट देना आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। आजाद के अनुसार, यदि समाज ने आज शिक्षा और हकों के लिए संघर्ष नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियां स्कूलों का दरवाजा तक नहीं देख पाएंगी।

राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए चंद्रशेखर ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे 'जातियों के भूत' को उतारकर एकजुट हों। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल और विपक्षी दल केवल जातियों में बांटकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने एक विवादास्पद लेकिन गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को मुस्लिम समाज का भरपूर समर्थन मिला था, लेकिन उस दौर में 'मिस्टर गांधी' ने उनका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि आज भी राजनीति उसी पुराने ढर्रे पर चल रही है, जहां बहुजन समाज के वोटों का इस्तेमाल तो होता है, लेकिन उन्हें नेतृत्व देने से परहेज किया जाता है।

आजाद ने युवाओं को एक विशेष संदेश देते हुए कहा कि अपने महापुरुषों को केवल 'पूजने' से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें 'पढ़ने' की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा, "विपक्षी यही चाहते हैं कि आप केवल महापुरुषों की मूर्तियों पर फूल चढ़ाएं, लेकिन जिस दिन आप उन्हें पढ़ लेंगे, आप अपने हक के लिए लड़ना सीख जाएंगे।" इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी की विचारधारा में मंडल कमीशन लागू करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह और बी.पी. मंडल के नाम को भी औपचारिक रूप से जोड़ने का ऐलान किया, जो पिछड़ों को साधने की एक बड़ी रणनीति मानी जा रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अगले सात-आठ महीनों तक चैन से न बैठें और गांव-गांव जाकर 'बहुजन सत्ता' का संकल्प पूरा करने के लिए जुट जाएं।

खबर का बैकग्राउंड:

उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी अपनी जड़ें मजबूत करने में जुटी है। लोकसभा चुनाव में नगीना सीट से जीत दर्ज करने के बाद चंद्रशेखर का कद बढ़ा है। अब वे 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दलितों के साथ-साथ पिछड़ों और मुसलमानों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए 'PDA' के एजेंडे को और अधिक धार दे रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ का यह सम्मेलन आयोजित किया गया था।

पब्लिक इम्पैक्ट:

आजाद की इन मांगों का सीधा असर उत्तर प्रदेश की ग्रामीण और कस्बाई आबादी पर पड़ सकता है। 15% अतिरिक्त आरक्षण की मांग से अति पिछड़ी जातियों के बीच एक नई बहस शुरू हो सकती है। वहीं, शिक्षा और पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे मध्यमवर्गीय सरकारी कर्मचारियों और छात्र वर्ग को पार्टी के प्रति आकर्षित कर सकते हैं। राशन बनाम शिक्षा की बहस भी जमीनी स्तर पर मतदाताओं के सोचने का नजरिया बदल सकती है।

UP Prime News एनालिसिस:

चंद्रशेखर आजाद का यह कदम उत्तर प्रदेश में पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति को चुनौती देने वाला है। पिछड़ों और अति पिछड़ों के लिए अलग आरक्षण की मांग करके उन्होंने सपा और भाजपा दोनों के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। यह रणनीति 2027 के चुनावों में ध्रुवीकरण की जगह सामाजिक न्याय के मुद्दे को केंद्र में ला सकती है।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | UP Prime News

Published: April 14, 2026 | 1:34 PM IST

By UP Prime News Desk





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