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अतीक अहमद की 50 बीघे बेनामी जमीन का खुलासा, एलडीए की वेलनेस सिटी योजना में बड़ी कार्रवाई की तैयारी

 उत्तर प्रदेश:

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भू-माफियाओं और अवैध संपत्तियों के खिलाफ प्रशासन का डंडा एक बार फिर पूरी मजबूती से चलता दिखाई दे रहा है। ताजा मामले में, दिवंगत माफिया अतीक अहमद की 50 बीघे से अधिक बेनामी जमीन का बड़ा खुलासा हुआ है। यह बेशकीमती जमीन लखनऊ के सुल्तानपुर रोड पर स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की महत्वाकांक्षी 'वेलनेस सिटी' आवासीय योजना के दायरे में और उसके आसपास पाई गई है। एलडीए की एक गोपनीय जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद अब प्रशासन इस विशाल भूखंड को जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

लखनऊ में अतीक अहमद की बेनामी जमीन की जांच
अतीक अहमद फोटो : UP Prime News








जांच के दौरान यह भी पता चला है कि अतीक अहमद अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसने यहाँ निवेश किया था। वेलनेस सिटी योजना के अंतर्गत करीब 20 से 25 अन्य प्रभावशाली लोग और सफेदपोश भी रडार पर आए हैं, जिनकी लगभग 200 बीघा बेनामी जमीन इसी क्षेत्र में होने की आशंका है। एलडीए की सतर्कता टीम और राजस्व विभाग अब इन सभी संपत्तियों के खसरा नंबर और वर्तमान खतौनी में दर्ज नामों की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कागजों पर दर्ज नाम असली खरीदारों के हैं या फिर माफियाओं ने 'डमी' खरीदारों के जरिए इन जमीनों पर अपना कब्जा जमा रखा था।

एलडीए की यह 'वेलनेस सिटी' योजना लगभग 1198 एकड़ के विशाल क्षेत्र में लैंड पूलिंग के जरिए विकसित की जा रही है। हालांकि, पिछले 10 महीनों से इस परियोजना की रफ्तार काफी धीमी रही है। योजना को गति न मिल पाने का मुख्य कारण जमीन की अनुपलब्धता बताई जा रही है। अब तक विभाग को कुल आवश्यकता की केवल एक-चौथाई जमीन ही मिल पाई है। जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि इस देरी के पीछे बड़े भू-माफियाओं और रसूखदार लोगों का खेल है, जिन्होंने पहले ही बड़ी मात्रा में बेनामी संपत्तियां यहां दबा रखी हैं।

विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, सुल्तानपुर रोड पर विकसित होने वाली इस योजना में आठ प्रमुख गांवों को शामिल किया गया है। इनमें बक्कास, मलूकपुर, ढकवा, चौरहिया, चौरासी, दुलारमऊ, नूरपुर बेहटा और मस्तमऊ गांव प्रमुख हैं। हैरानी की बात यह है कि इन गांवों में करीब एक दर्जन रियल एस्टेट कंपनियों ने आवासीय योजना की घोषणा से काफी पहले ही बड़ी मात्रा में जमीनें खरीद ली थीं। इन कंपनियों ने एलडीए से लेआउट भी पास करा लिया है, जिससे सरकारी योजना के लिए लैंड पूलिंग करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सूत्रों का दावा है कि इनमें से एक प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी जौनपुर के एक चर्चित पूर्व सांसद की है, जिसमें जमीनें उनके करीबियों और रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं।

वेलनेस सिटी की तुलना अगर बगल में स्थित आईटी सिटी से की जाए, तो इसकी लोकेशन को बेहद खास माना जा रहा है। यह योजना गोमती नगर विस्तार से बिल्कुल सटी हुई है, जिसके कारण यहां निवेश करने वाले लोग तुरंत घर बनाकर रहने की स्थिति में होंगे। जहां आईटी सिटी को पूरी तरह आबाद होने में अभी कम से कम पांच साल का समय लग सकता है, वहीं वेलनेस सिटी अपनी कनेक्टिविटी के कारण पहली पसंद बनी हुई है। यही वजह है कि यहां जमीनों के दाम भी काफी ऊंचे रहने की उम्मीद है। एलडीए ने जहां आईटी सिटी में करीब 4000 रुपये प्रति वर्ग फीट का रेट प्रस्तावित किया है, वहीं वेलनेस सिटी में यह दर 5000 रुपये प्रति वर्ग फीट से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

एलडीए के उपाध्यक्ष (वीसी) प्रथमेश कुमार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि कुछ संदिग्ध बेनामी जमीनों की सूची तैयार कर ली गई है। इस संबंध में जिला प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की गई है। राजस्व रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के मिलान के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि किस खसरा नंबर की जमीन असल में किसकी है। यदि जांच में माफिया अतीक अहमद या अन्य प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के पक्के सबूत मिलते हैं, तो गैंगस्टर एक्ट और बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खबर का बैकग्राउंड:

उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से माफियाओं द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को कुर्क करने का अभियान चला रही है। अतीक अहमद की मौत के बाद भी उसकी बेनामी संपत्तियों को खोजने का सिलसिला जारी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण अपनी आवासीय योजनाओं को पूरा करने के लिए लैंड पूलिंग नीति का सहारा ले रहा है, लेकिन माफियाओं के पुराने निवेश के कारण इन योजनाओं में देरी हो रही है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस खुलासे और संभावित जब्ती से लखनऊ में घर का सपना देख रहे आम नागरिकों को बड़ा फायदा होगा। माफियाओं के कब्जे से मुक्त हुई जमीन जब सरकारी योजना का हिस्सा बनेगी, तो आम जनता को पारदर्शी तरीके से और उचित दरों पर प्लॉट उपलब्ध हो सकेंगे। इसके अलावा, बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और अवैध कब्जेदारों का डर कम होगा।

UP Prime News एनालिसिस:

प्रशासन द्वारा माफियाओं की बेनामी संपत्तियों को निशाना बनाना कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, रियल एस्टेट कंपनियों और पूर्व जन प्रतिनिधियों के शामिल होने से यह मामला जटिल हो सकता है, जिसके लिए निष्पक्ष और गहन जांच की आवश्यकता है।

लखनऊ | UP Prime News

Published: 20 Apr 2026 | 10:21 AM IST

By UP Prime News Desk



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