उत्तर प्रदेश (प्रयागराज):
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ कृषि कार्य के दौरान एक होनहार युवक की जान चली गई। जिले के गंगानगर इलाके के अंतर्गत आने वाले बहरिया थाना क्षेत्र के मजूर गांव में गेहूं की मड़ाई (थ्रेसिंग) के दौरान हुए एक भीषण हादसे में 18 साल के युवक सुमित की मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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| थ्रेशर मशीन हादसा प्रयागराज फोटो : U P prime news |
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन दिनों ग्रामीण इलाकों में रबी की फसल, विशेषकर गेहूं की कटाई और मड़ाई का काम जोरों पर चल रहा है। मजूर गांव के निवासी राजकुमार का 18 वर्षीय बेटा सुमित भी अपने परिवार के साथ खेत में थ्रेशर मशीन के जरिए गेहूं की बालियों से दाने निकालने का काम कर रहा था। काम के दौरान सुमित मशीन में गेहूं की बालियां डाल रहा था, तभी अचानक उसका हाथ मशीन के रोटर के पास फंस गया। मशीन की गति इतनी तेज थी कि जब तक सुमित खुद को संभाल पाता या आसपास के लोग मशीन बंद कर पाते, उसका पूरा शरीर मशीन के भीतर खिंचता चला गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही हादसा हुआ, वहां मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। आसपास काम कर रहे अन्य किसान और मजदूर तुरंत मौके की ओर दौड़े और मशीन को बंद करने का प्रयास किया। हालांकि, जब तक थ्रेशर को पूरी तरह रोका गया, तब तक सुमित की जान जा चुकी थी। युवक की ऐसी वीभत्स स्थिति देखकर वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। घटना की सूचना मिलते ही सुमित के घर में कोहराम मच गया। गांव के सैकड़ों लोग खेत की ओर दौड़ पड़े। सूचना पर बहरिया थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद युवक के शव को मशीन से बाहर निकाला और अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह एक हादसा प्रतीत हो रहा है, लेकिन मशीन में किसी तकनीकी खामी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कोण से भी मामले की जांच की जा रही है। परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इस हादसे ने एक बार फिर खेती-किसानी के दौरान इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों के संचालन में सुरक्षा के महत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर युवा और कम उम्र के लड़के इन मशीनों पर काम करते हैं, जहां जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित होती है। सुमित अभी अपनी जिंदगी के शुरुआती पड़ाव पर था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इस आकस्मिक घटना ने सब कुछ छीन लिया।
खबर का बैकग्राउंड:
उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में मार्च और अप्रैल का महीना गेहूं की फसल की मड़ाई का होता है। इस दौरान थ्रेशर मशीनों का उपयोग व्यापक स्तर पर किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में प्रयागराज और आसपास के जिलों से थ्रेशर हादसे की कई खबरें आई हैं, जिनमें अक्सर सुरक्षा गार्ड न होने या काम की थकान के कारण होने वाली चूक मुख्य वजह बनकर उभरती है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घटना का आम जनता, विशेषकर किसान परिवारों पर गहरा असर पड़ा है। यह हादसा खेती के दौरान बरती जाने वाली असावधानी के प्रति सचेत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि सुरक्षा को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। इस तरह के हादसों से न केवल एक जान जाती है, बल्कि एक पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट जाता है। प्रशासन को चाहिए कि वह कृषि यंत्रों के सुरक्षित उपयोग के लिए दिशानिर्देश जारी करे।
UP Prime News एनालिसिस:
कृषि कार्य में मशीनीकरण ने काम तो आसान किया है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी ग्रामीण क्षेत्रों में जानलेवा साबित हो रही है। इस घटना में युवक की कम उम्र और मशीन की तेज रफ्तार का तालमेल न बैठ पाना दुखद रहा।
खेती के दौरान थ्रेशर मशीनों के उपयोग में सावधानियां (विस्तृत जानकारी):
अक्सर देखा जाता है कि मड़ाई के समय किसान भाई जल्दी काम खत्म करने के चक्कर में सुरक्षा के नियमों को ताक पर रख देते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, थ्रेशर मशीन पर काम करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:
ढीले कपड़े न पहनें: थ्रेशर पर काम करते समय धोती, ढीला कुर्ता या गमछा गले में नहीं डालना चाहिए। सुमित के मामले में भी यह संभावना हो सकती है कि किसी कपड़े के फंसने से शरीर मशीन की ओर खिंचा हो।
थकान में काम न करें: रात के समय या अत्यधिक थकान होने पर थ्रेशर का संचालन खतरनाक हो सकता है क्योंकि एकाग्रता कम हो जाती है।
नशे से दूर रहें: अक्सर मड़ाई के दौरान लोग नशे का सेवन कर लेते हैं, जो रिफ्लेक्स एक्शन को धीमा कर देता है और हादसे का कारण बनता है।
सुरक्षा घेरा (Feeding Chute): मशीन का फीडिंग च्यूट कम से कम 2.5 फीट लंबा होना चाहिए ताकि हाथ सीधे कटर तक न पहुंच सके।
बच्चों को दूर रखें: किशोरों और बच्चों को ऐसी भारी मशीनों के पास काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि उनमें अनुभव की कमी होती है।
प्रयागराज की इस घटना ने पूरे जिले के किसानों को झकझोर कर रख दिया है। सुमित के पिता राजकुमार ने कभी नहीं सोचा था कि जिस फसल को पाल-पोसकर उन्होंने बड़ा किया, उसी की मड़ाई उनके बुढ़ापे की लाठी छीन लेगी। स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग को चाहिए कि वे गांव-गांव जाकर इस संबंध में जागरूकता शिविर लगाएं ताकि भविष्य में किसी अन्य सुमित को अपनी जान न गंवानी पड़े।
मृतक सुमित की शिक्षा और उसके भविष्य के सपनों के बारे में जानकर गांव वाले और भी दुखी हैं। वह एक मेहनती युवक था जो पढ़ाई के साथ-साथ खेती में अपने पिता का हाथ बटाता था। अब उसके पीछे परिवार में केवल यादें और एक गहरा शून्य बचा है।
प्रयागराज | UP Prime News
Published: 08 अप्रैल 2026 | 11:15 AM IST
By UP Prime News Desk
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