करोड़ों की कफ सिरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल पर इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस, दुबई में छिपे आरोपी की जल्द होगी गिरफ्तारी
वाराणसी (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के वाराणसी सहित कई जिलों में प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी का साम्राज्य चलाने वाले मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के खिलाफ कानून का शिकंजा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कस गया है। लंबे समय से फरार चल रहे शुभम के खिलाफ इंटरपोल (Interpol) ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है। वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने इस बड़ी उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि अब इस नोटिस के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आरोपी की गिरफ्तारी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जांच एजेंसियों के पास पुख्ता जानकारी है कि देश छोड़ने के बाद शुभम की अंतिम लोकेशन दुबई में मिली थी, जिसके बाद से ही उसकी तलाश के लिए कूटनीतिक और कानूनी प्रयास तेज कर दिए गए थे।
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| शुभम जायसवाल और उसका घर फोटो : U P prime news |
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, शुभम जायसवाल पिछले पांच महीनों से फरार चल रहा है। उसके खिलाफ वाराणसी, सोनभद्र और गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मादक पदार्थों की तस्करी (NDPS Act) के तहत 10 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। इस मामले में पुलिस और एसआईटी (SIT) की कार्रवाई इतनी व्यापक रही है कि अब तक आरोपी की 100 करोड़ रुपये से भी अधिक की चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। शुभम की गिरफ्तारी के लिए जारी किए गए रेड कॉर्नर नोटिस में उसका पूरा शारीरिक विवरण भी दिया गया है, ताकि उसे पहचानने में कोई चूक न हो। नोटिस के अनुसार, शुभम की ऊंचाई लगभग 5 फीट 9 इंच (1.8 मीटर) है, वजन करीब 85 किलोग्राम, बाल काले, आंखें काली और उसकी विशिष्ट पहचान उसकी घनी दाढ़ी को बताया गया है।
इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने पिछले पांच महीनों में कड़ी मेहनत की है। पुलिस ने ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली की तहरीर पर शुभम, उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल और 26 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ीं, इस काले कारोबार में शामिल अन्य नाम भी सामने आते गए। अब तक की जांच के बाद पुलिस ने कुल 39 हजार पन्नों की एक विशाल चार्जशीट तैयार की है, जो इस तस्करी रैकेट की गहराई को दर्शाती है। आरोपी शुभम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बेहद शातिर योजना बनाई थी। 15 नवंबर 2025 को वाराणसी के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज होने से ठीक 10 दिन पहले यानी 5 नवंबर को वह कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दुबई के लिए रवाना हो गया था।
हवाला और काली कमाई का बड़ा नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई को सफेद करने के लिए 'हवाला' और 'मनी लॉन्ड्रिंग' का सहारा लिया गया था। एसआईटी ने जब मामले की गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि तस्करी के पैसों का लेनदेन हवाला कारोबारियों के जरिए होता था। इस मामले में पुलिस ने प्रतीक गुजराती, मोहित सारस्वा, रामअवतार और सेरूणा के गिरधारी को गिरफ्तार किया है, जो नाटी इमली के संजय नगर कॉलोनी में रहकर हवाला नेटवर्क संचालित कर रहे थे। इसके अलावा देवरिया के संतोष गिरि और बलिया के ओमप्रकाश खरवार को भी दबोचा गया है। इन सभी का संबंध दारा नगर निवासी बर्तन कारोबारी वैभव जायसवाल से पाया गया है।
हैरानी की बात यह है कि तस्करी के काले धन को निवेश करने के लिए शराब के ठेकों का सहारा लिया गया। शुभम और उसके परिवार ने 'शैली ट्रेडर्स' के नाम से लॉटरी सिस्टम के जरिए वैभव जायसवाल की मां राधिका और पत्नी शिवांगी समेत पांच महिलाओं के नाम पर शराब के ठेके लिए थे। हालांकि, पुलिस ने जब इन महिलाओं को कोर्ट में पेश कर 14 दिन की रिमांड मांगी, तो साक्ष्यों की कमी और अन्य पहलुओं को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें फिलहाल रिहा कर दिया है। पुलिस का कहना है कि शुभम की गिरफ्तारी के बाद इन सभी कड़ियों को जोड़कर पूछताछ की जाएगी।
SIT की कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम
इस मामले में एसआईटी ने चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की है, जिसका विवरण इस प्रकार है:
19 नवंबर 2025: रोहनिया पुलिस ने 500 पेटी से ज्यादा प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद कर केस दर्ज किया।
22 जनवरी: शुभम के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी हुआ।
24 फरवरी: कुर्की से पूर्व की उद्घोषणा का नोटिस जारी किया गया।
26 फरवरी: शुभम के घर पर पुलिस ने नोटिस चस्पा किया, जिसे देखकर पुलिस भी उसके आलीशान मकान और वैभव को देखकर दंग रह गई।
27 फरवरी: विभिन्न समाचार पत्रों में भगोड़ा घोषित करने का इश्तहार प्रकाशित कराया गया।
30 मार्च: अदालत ने उसे पेश होने का अंतिम अवसर दिया।
01 अप्रैल: कोतवाली पुलिस ने कोर्ट में पेश न होने पर अलग से केस दर्ज किया।
05 अप्रैल: कोर्ट ने शुभम को आधिकारिक तौर पर 'भगोड़ा' घोषित कर दिया।
वर्तमान में शुभम के पिता भोला प्रसाद जायसवाल को सोनभद्र पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार किया था और वह अभी जेल में हैं। इसके अलावा विकास नरवे, अमित सिंह टाटा, अमित यादव, अमित जायसवाल, दिवेश जायसवाल और आकाश पाठक जैसे कई आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। अब रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद भारत सरकार दुबई प्रशासन के साथ मिलकर शुभम के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करेगी ताकि उसे भारत लाकर अदालत में पेश किया जा सके।
खबर का बैकग्राउंड:
यह पूरा मामला कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में फैले इस नेटवर्क का मुख्य सरगना शुभम जायसवाल है। दवा की आड़ में नशीले सिरप की सप्लाई कर करोड़ों रुपये कमाए गए। पुलिस ने जब छापेमारी शुरू की, तो शुभम के घर की विलासिता देख अधिकारी भी हैरान रह गए थे, जिसमें छत पर स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं मौजूद थीं।
पब्लिक इम्पैक्ट:
नशीले कफ सिरप की तस्करी का सबसे बुरा असर युवा पीढ़ी और छात्रों पर पड़ रहा है। सस्ते नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाले इन सिरप ने कई परिवारों को तबाह किया है। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई और इंटरपोल के दखल से जनता के बीच यह संदेश गया है कि अपराधी चाहे सात समंदर पार भी क्यों न छिप जाए, कानून के लंबे हाथ उस तक जरूर पहुंचेंगे। तस्करी नेटवर्क टूटने से नशीली दवाओं की उपलब्धता कम होगी।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की आधुनिक जांच प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण है। 39,000 पन्नों की चार्जशीट और रेड कॉर्नर नोटिस यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार संगठित अपराध और ड्रग माफियाओं के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। अब सबकी नजरें शुभम के प्रत्यर्पण और उसकी गिरफ्तारी पर टिकी हैं।
वाराणसी | UP Prime News
Published: Friday, April 10, 2026 | 08: 14 AM IST
By UP Prime News Desk

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