महोबा में सपा सांसद की पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल, सीएम योगी ने साधा निशाना
उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में सोमवार को उस समय एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब समाजवादी पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हमीरपुर-महोबा लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र और अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया। इस घटना के बाद न केवल महोबा, बल्कि पूरे प्रदेश का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। सांसद के इस व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसे लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हमलावर रुख अपना लिया है।
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| फोटो : UP Prime News |
जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर और बढ़ती महंगाई जैसे जनहित के मुद्दों को लेकर महोबा कलेक्ट्रेट में अपना विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। प्रदर्शन का नेतृत्व सांसद अजेंद्र सिंह लोधी और जिलाध्यक्ष शोभा लाल यादव कर रहे थे। ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब सांसद मीडिया से रूबरू हुए, तो प्रधानमंत्री की नीतियों और उनकी विदेश यात्राओं पर सवाल उठाते हुए वह अपनी मर्यादा खो बैठे और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर दिया।
सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने अपने संबोधन में सरकार को घेरते हुए कहा कि वर्तमान सरकार जनता की समस्याओं की अनदेखी करने में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। उन्होंने स्मार्ट मीटर, फसल बीमा योजना और शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पदों जैसे मुद्दों को उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी दौरों और उनके खर्चों को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे असंसदीय माना जा रहा है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के कई बड़े नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।
सांसद के बयान के मुख्य बिंदु और आरोप
विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसद लोधी ने कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "हम लोग PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की ताकत के साथ हैं और वर्तमान सरकार की जनविरोधी नीतियों के कट्टर विरोधी हैं। स्मार्ट मीटरों के माध्यम से जनता को लूटा जा रहा है। चाहे बिजली आए या न आए, मीटर तेजी से भाग रहे हैं। फसल बीमा में सबसे बड़ा घोटाला हुआ है, जिसका खामियाजा किसान भुगत रहा है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षकों के पद खाली हैं, लेकिन नई भर्तियाँ नहीं की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की स्थिति पर उन्होंने कहा कि कहीं दवा है तो डॉक्टर नहीं, और जहाँ कर्मचारी हैं वहां दवाइयों का अभाव है।
इतना ही नहीं, सांसद ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर दावा किया कि सपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए पश्चिम बंगाल चुनाव का उदाहरण दिया और आरोप लगाया कि सरकार पुलिस बल और केंद्रीय बलों (CRPF) का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए कर रही है।
मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
सांसद के इस विवादित बयान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर आघात बताते हुए लिखा कि "विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय जननेता आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति एक सांसद द्वारा की गई असंसदीय टिप्पणी न केवल अशोभनीय और अक्षम्य है, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी गंभीर आघात है। यह कृत्य राजनीतिक कुसंस्कार, वैचारिक दिवालियापन और सार्वजनिक जीवन की शालीनता के प्रति अनादर को प्रकट करता है।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देश की जनता ऐसे अमर्यादित आचरण का उत्तर सही समय पर अवश्य देगी।
गोरखपुर के सांसद और अभिनेता रवि किशन ने भी इस मुद्दे पर अजेंद्र सिंह लोधी को घेरा। उन्होंने इसे समाजवादी पार्टी की 'वास्तविक मानसिकता' करार देते हुए कहा कि 145 करोड़ देशवासियों के जनादेश का अपमान करने के लिए लोधी को तुरंत माफी मांगनी चाहिए। वहीं, भाजपा के हमीरपुर जिलाध्यक्ष कुलदीप निषाद ने कहा कि अगर नीतियों से लड़ाई है तो तथ्यों पर बात करें, लेकिन सड़क छाप भाषा का इस्तेमाल किसी भी जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता।
खबर का बैकग्राउंड:
यह पूरा मामला महोबा में बिजली की समस्याओं और बढ़ती महंगाई को लेकर सपा द्वारा आयोजित एक जिला स्तरीय विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। विपक्षी पार्टियाँ लगातार स्मार्ट मीटर और निजीकरण को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। इसी कड़ी में विरोध दर्ज कराने के दौरान सांसद की जुबान फिसल गई, जिससे अब यह एक बड़ा राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
जनप्रतिनिधियों द्वारा इस प्रकार की अभद्र भाषा के प्रयोग से सार्वजनिक संवाद का स्तर गिरता है। आम जनता में इस बात को लेकर नाराजगी देखी जा रही है कि ज्वलंत मुद्दों (जैसे बिजली, बेरोजगारी) पर चर्चा होने के बजाय अब बहस केवल एक-दूसरे को गाली देने या अपमानित करने तक सीमित हो गई है। इसका समाज पर नकारात्मक असर पड़ता है और युवाओं के लिए यह एक गलत उदाहरण पेश करता है।
UP Prime News एनालिसिस:
लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन असंसदीय भाषा का प्रयोग किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। जनहित के मुद्दों पर लड़ाई वैचारिक और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए न कि व्यक्तिगत आक्षेपों पर।
महोबा | UP Prime News
Published: May 12, 2026 | 08:06 AM IST
By UP Prime News Desk

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