उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव और ओपी राजभर आमने-सामने
उत्तर प्रदेश]:
उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही सूबे की सियासत गरमा गई है। नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद भी उन्हें विभाग न मिलने को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि मंत्रालय बांटने में देरी की असली वजह 'कमीशन-खोरों' और 'डबल इंजन' के बीच चल रहा आपसी टकराव है।
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| फोटो : UP Prime News |
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि नए मंत्री अभी केवल दर्शक की भूमिका में हैं और वे सरकारी फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं। सपा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकर्ता और जनता इन मंत्रियों के कामकाज की निगरानी करेंगे ताकि सरकारी खजाने का दुरुपयोग न हो। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा कि जनता अब सोशल मीडिया और सिटीजन जर्नलिज्म के जरिए खुद सरकार के हर कदम पर नजर रखेगी।
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अखिलेश के इस हमले पर सुहेलदेवफोटो भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कड़ा पलटवार किया। राजभर ने अखिलेश यादव की निजी पारिवारिक स्थिति का जिक्र करते हुए उन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अखिलेश को कम से कम तेरहवीं तक का इंतजार करना चाहिए और उसके बाद ही राजनीति करनी चाहिए। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि यदि अखिलेश को कोई विभाग चाहिए, तो वे सुभासपा में शामिल हो जाएं, वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहकर उन्हें भी मंत्री बनवा देंगे।
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वहीं, इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सपा सरकार के पुराने दौर को याद दिलाते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। शुक्ला ने आरोप लगाया कि अखिलेश के शासनकाल में 'साढ़े तीन मुख्यमंत्री' हुआ करते थे, जहां परिवार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग स्तरों पर हस्तक्षेप करते थे। उन्होंने सपा को परिवारवादी पार्टी बताते हुए कहा कि जो लोग संगठन की प्रक्रिया को नहीं समझते, वे केवल सोशल मीडिया पर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं।
खबर का बैकग्राउंड:
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में हाल ही में कुछ नए चेहरों को जगह दी गई थी, जिसका उद्देश्य आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी समीकरणों को साधना माना जा रहा है। हालांकि, शपथ ग्रहण के कई दिनों बाद तक भी विभागों का बंटवारा न हो पाना विपक्ष को सरकार को घेरने का एक मौका दे गया। यह विवाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
मंत्रालयों का बंटवारा न होने से शासन और प्रशासन के फैसलों की गति पर असर पड़ सकता है। आम जनता के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित मंत्री और विभाग की जवाबदेही तय करने में देरी हो रही है। जब तक विभाग आवंटित नहीं होते, तब तक सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता की शिकायतों के निपटारे में संशय की स्थिति बनी रहती है।
UP Prime News एनालिसिस:
विभागों के बंटवारे में देरी एक प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इसे राजनीतिक चश्मे से देखना सत्ता और विपक्ष के बीच के गहरे अविश्वास को उजागर करता है। जहां विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का मुद्दा बना रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे आंतरिक तालमेल की प्रक्रिया बताकर खारिज कर रहा है। अंततः, जनता के लिए यह जरूरी है कि जल्द से जल्द जिम्मेदारियां तय हों ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।
[उत्तर प्रदेश] | UP Prime News
Published: May 17, 2026 | 07:25 AM IST
By UP Prime News Desk



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