इलाहाबाद हाईकोर्ट: वाराणसी गंगा नाव पार्टी केस में 8 आरोपियों को मिली जमानत
उत्तर प्रदेश]:
वाराणसी की गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान कथित तौर पर नॉन-वेज (चिकन बिरयानी) खाने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों में से 8 लोगों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह मामला काफी समय से चर्चा का विषय बना हुआ था, जिस पर अब कानूनी प्रक्रिया के तहत बड़ी राहत मिली है।
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न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला और न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने जिन लोगों को जमानत दी है, उनमें दानिश सैफी, आमिर कैफ और नुरुल इस्लाम समेत कुल आठ याचिकाकर्ता शामिल हैं। इन सभी पर गंगा नदी की पवित्रता को प्रभावित करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप था। हालांकि, बाकी बचे 6 आरोपियों की जमानत पर अभी फैसला आना बाकी है, जिसकी अगली सुनवाई अदालत द्वारा सोमवार, 18 मई को निर्धारित की गई है।
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| फोटो : UP Prime News |
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत मार्च 2026 में हुई थी, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में अस्सी घाट से नमो घाट के बीच चलती नाव पर कुछ युवकों को पार्टी करते और कथित तौर पर नॉन-वेज खाते देखा गया था। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर काफी विरोध हुआ और धार्मिक भावनाओं को आहत करने व गंगा को प्रदूषित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था।
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| Ai वाराणसी घाट सांकेतिक फोटो : UP Prime News |
खबर का बैकग्राउंड:
इस विवाद की जड़ सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ और नियमों की अनदेखी बनी। वाराणसी के गंगा तट पर नाव का संचालन करने वाले नियमों के उल्लंघन और पवित्र क्षेत्र में धार्मिक मर्यादाओं को दरकिनार करने के आरोप में भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने मार्च महीने में कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया, बल्कि शहर भर में लाइफ जैकेट न रखने वाली और नियमों का पालन न करने वाली नावों के खिलाफ व्यापक अभियान भी चलाया था।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घटना और इसके बाद हुई कानूनी कार्रवाई का सीधा असर वाराणसी में नाव संचालन करने वालों और पर्यटकों पर पड़ा है। प्रशासन अब गंगा में किसी भी प्रकार की गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क हो गया है। आम जनता के लिए यह घटना एक संदेश है कि सार्वजनिक धार्मिक स्थलों और पवित्र नदियों की मर्यादा का ध्यान रखना कितना आवश्यक है। साथ ही, अब घाटों पर सुरक्षा और नियम-कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न हो।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला कानून और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन का एक उदाहरण है। जहां अदालत ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जमानत पर फैसला दिया है, वहीं यह घटना यह भी दर्शाती है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सार्वजनिक स्थान पर की गई गतिविधि कितनी जल्दी विवाद का रूप ले सकती है। प्रशासन को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन कराना होगा।
[वाराणसी] | UP Prime News
Published: 15 मई, 2026 | 02:20 PM IST
By UP Prime News Desk



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