UP PRIME NEWS: कानपुर में 5 घंटे में 'फाइनल' हुई FIR, कोर्ट ने विवेचक पर दिए कार्रवाई के आदेश!
कानपुर। सूबे की कानून व्यवस्था को तार-तार करती एक चौंकाने वाली खबर कानपुर से सामने आई है, जहां एक पुलिस विवेचक ने महज पांच घंटे के भीतर ही एक गंभीर मामले की विवेचना पूरी कर फाइनल रिपोर्ट (FR) कोर्ट में दाखिल कर दी। इस अविश्वसनीय 'तेजी' पर कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए विवेचक राजेश कुमार तिवारी के खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही, मामले की अग्रिम विवेचना अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) स्तर के अधिकारी से कराने का निर्देश पुलिस कमिश्नर को दिया है।
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| akhilesh dubey kanpur -photo: up prime news |
विस्तार
क्या है पूरा मामला?
जूही बारादेवी की निवासी प्रज्ञा त्रिवेदी ने कोर्ट के आदेश पर 31 जनवरी 2011 को जूही थाने में अजय निगम और चार अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और सोने की जंजीरें लूटने का मुकदमा दर्ज कराया था। प्रज्ञा का आरोप था कि 6 दिसंबर 2010 की शाम अजय ने उनके साथ इस वारदात को अंजाम दिया।
हैरानी की बात यह है कि यह FIR शाम 5:45 बजे दर्ज हुई और विवेचक राजेश कुमार तिवारी ने रात 10:30 बजे तक, यानी सिर्फ पांच घंटे में ही, विवेचना पूरी कर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट भेज दी।
विवेचक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
15 साल पुरानी इस फाइनल रिपोर्ट पर प्रज्ञा के अधिवक्ता ने कोर्ट में आपत्ति दाखिल की। अधिवक्ता ने बताया कि विवेचक ने प्रज्ञा का कोई बयान नहीं लिया और मनमाने ढंग से बयान दर्ज किए। घटना के गवाहों के बयान दर्ज करने के बजाय अभियुक्तों से जुड़े लोगों के बयान लिए गए। लूट के माल की बरामदगी का कोई प्रयास नहीं हुआ। आरोप लगाया गया कि विवेचक ने अभियुक्तों के प्रभाव में आकर एक ही जगह बैठकर विवेचना पूरी कर दी। फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद भी प्रज्ञा को धमकियां मिलती रहीं, जिसके चलते उन्हें मायके में रहना पड़ा। सबसे गंभीर बात यह कि फाइनल रिपोर्ट दाखिल होने के बावजूद प्रज्ञा को कभी कोर्ट से समन नहीं भेजा गया, ताकि वह आपत्ति न दर्ज करा सकें।
कोर्ट का सख्त आदेश
अधिवक्ता द्वारा दाखिल आपत्ति और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम ईशा अग्रवाल की कोर्ट ने प्रज्ञा के मामले में दाखिल फाइनल रिपोर्ट को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि:
आदेश की प्रति मिलने के तीन दिन के अंदर ASP स्तर के अधिकारी से अग्रिम विवेचना कराई जाए।
वादी और अन्य गवाहों के बयान दर्ज कर कानून के अनुसार साक्ष्य जुटाए जाएं और समय पर रिपोर्ट कोर्ट भेजी जाए।
पांच घंटे में विवेचना पूरी कर FR लगाने को विवेचक राजेश कुमार तिवारी की कर्तव्य के प्रति लापरवाही और गंभीर कदाचार मानते हुए उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक जांच की जाए।
कार्रवाई की रिपोर्ट सात दिन के अंदर कोर्ट भेजी जाए।
अखिलेश दुबे गैंग से भी जुड़ा है पीड़िता का नाम
यह भी गौरतलब है कि इस मुकदमे में पीड़िता प्रज्ञा त्रिवेदी वही महिला हैं, जिन्होंने हाल ही में पुलिस कमिश्नरी के ऑपरेशन महाकाल के तहत अखिलेश दुबे गैंग के खिलाफ एसआईटी को प्रार्थना पत्र दिया था। प्रज्ञा ने आरोप लगाया था कि 2009 में क्लासिक कॉन्टिनेंटल होटल खरीदने के बाद अखिलेश दुबे ने उनसे रंगदारी मांगी और फिर होटल पर कब्जा करने के लिए उन्हें प्रताड़ित किया।
प्रज्ञा ने बताया कि अखिलेश ने उनके खिलाफ अश्लील किताबें छपवाकर बंटवा दीं, जिससे उनके साझेदार ने होटल छोड़ दिया। उन्हें शादी के मंडप से उठवा लेने तक की धमकी मिली थी। अखिलेश के प्रभाव के चलते उनकी शिकायत दर्ज नहीं हुई, बल्कि उलटा उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

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