नकल रोकने की कीमत चुकाई थी जान देकर, 12 साल बाद NSG कमांडो के हत्यारों को मिली उम्रकैद; खाकी ने निभाया 'राखी' का धर्म!
अलीगढ़ | UP Prime News विशेष रिपोर्ट
रिपोर्टर: [आपका नाम/ब्यूरो]
अलीगढ़: कहते हैं कि न्याय मिलने में देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं। अलीगढ़ की एक अदालत ने 12 साल पुराने चर्चित 'एनएसजी (NSG) कमांडो हत्याकांड' में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। UP Prime News को मिली जानकारी के अनुसार, देश के जांबाज सिपाही की हत्या करने वाले 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
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| दोषी फोटो :- up prime news |
क्या था पूरा मामला? (खूनी संघर्ष की वो शाम)
यह घटना 12 मार्च 2013 की है। अलीगढ़ के गोंडा थाना क्षेत्र के मुरवार इंटर कॉलेज में बोर्ड की परीक्षाएं चल रही थीं। गांव का ही रहने वाला जांबाज NSG कमांडो तेजवीर सिंह उन दिनों छुट्टी पर घर आया हुआ था। परीक्षा केंद्र पर पड़ोसी गांव रजावल का दबंग रामप्रकाश प्रधान अपने बेटे को खुलेआम नकल करा रहा था।
जब कमांडो तेजवीर और गांव के ही कुलदीप ने इस धांधली का विरोध किया, तो दबंग रामप्रकाश आगबबूला हो गया। उसने अपने बेटों सोनू और बंटू (कोमल) को हथियारों के साथ बुला लिया। मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया और आरोपियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में कमांडो तेजवीर शहीद हो गए और कुलदीप गंभीर रूप से घायल हुआ।
अदालत का फैसला: 7 को उम्रकैद
एडीजे-4 रवीश कुमार अत्री की अदालत ने इस मामले में तथ्यों और गवाहों के आधार पर 7 आरोपियों को दोषी पाया।
सोनू, कोमल (बंटू), हरिओम, राजेंद्र, देवेंद्र, गुड्डू और राजकुमार को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
एक अन्य आरोपी मानवेंद्र को सिर्फ अवैध हथियार रखने का दोषी पाया गया और 2 साल की सजा दी गई, उसे हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।
मुख्य आरोपी रामप्रकाश प्रधान की मौत ट्रायल के दौरान ही हो गई थी।
एक 'राखी' का धर्म और खाकी का वचन
इस खबर का सबसे भावुक पहलू कमांडो तेजवीर की पत्नी पिंकी और तत्कालीन SSP (अब DIG) अमित पाठक का रिश्ता है। हत्याकांड के बाद जब जनता का गुस्सा फूट पड़ा था, तब तत्कालीन SSP अमित पाठक ने पिंकी को अपनी बहन मानकर न्याय का वचन दिया था। पिंकी ने उन्हें राखी बांधी थी। UP Prime News को पता चला है कि आज भी पिंकी हर साल अमित पाठक को राखी बांधने जाती हैं और इस फैसले के बाद उन्होंने पुलिस और न्यायपालिका का आभार जताया है।
शहीद की विरासत: अब SSB में सेवा दे रहीं पिंकी
तेजवीर की शहादत के बाद उनकी पत्नी पिंकी ने हार नहीं मानी। आज वह अपने दो बच्चों के साथ लखनऊ में रहती हैं और अपने पति की जगह SSB (सशस्त्र सीमा बल) में देश की सेवा कर रही हैं। वहीं, इस केस के मुख्य गवाह श्यामवीर (तेजवीर के भाई) ने 12 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
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