नशीले कफ सिरप के काले साम्राज्य पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सुरक्षित, क्या 40 आरोपियों को मिलेगी राहत?
प्रयागराज/उत्तर प्रदेश:
UP Prime News की विशेष रिपोर्ट: क्या है पूरा मामला?
यह मामला कोडीन युक्त (Codeine-based) कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़ा है। पुलिस और ड्रग विभाग की जांच में सामने आया कि यह सिर्फ दवाओं का व्यापार नहीं, बल्कि राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार फैला एक बड़ा ड्रग सिंडिकेट था। मुख्य आरोपी वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था, इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
कैसे चलता था मौत का यह व्यापार? (Modus Operandi)
यूपी एसटीएफ (UP STF) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
फर्जी ई-वे बिल का खेल: आरोपी विशाल और विभोर राणा के साथ मिलकर शुभम जायसवाल फर्जी ई-वे बिल तैयार करता था। माल को वैध दिखाने के लिए कागजों में हेरफेर की जाती थी।
लाइसेंस की आड़ में तस्करी: शुभम ने अपने पिता भोला जायसवाल के नाम पर रांची में 'एबॉट कंपनी' की सुपर स्टॉकिस्ट शिप हासिल कर ली थी। इसी वैध लाइसेंस के पीछे वह नशीले सिरप की अवैध सप्लाई को 'लीगल शिपमेंट' के रूप में दिखाता था।
हिमाचल से गाजियाबाद तक कनेक्शन: 'शैली ट्रेडर्स' नामक फर्म के जरिए हिमाचल प्रदेश से सिरप मंगाया जाता था और उसे गाजियाबाद के गुप्त गोदामों में स्टोर किया जाता था।
देश से विदेशों तक फैले थे तार
जांच में यह भी पाया गया कि यह सिंडिकेट केवल उत्तर प्रदेश (लखनऊ, वाराणसी, आगरा, सोनभद्र) तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इनके तार पश्चिम बंगाल, झारखंड और हरियाणा से भी जुड़े थे। इतना ही नहीं, यह नशीला सिरप अवैध रूप से बांग्लादेश और नेपाल तक तस्करी किया जाता था।
कोर्ट में अब क्या होगा?

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