सहारनपुर: 'मौत जवानी में होगी' व्हाट्सएप स्टेटस लगा बी.फार्मा छात्र ने दी जान, सदमे में परिवार
सहारनपुर (UP Prime News): उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहाँ छुटमलपुर कस्बे की नई बस्ती में रहने वाले 20 वर्षीय बी.फार्मा छात्र वंश ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। छात्र ने आत्मघाती कदम उठाने से पहले अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर एक दर्दनाक संदेश लिखा था— "लगता है मौत जवानी में होगी।"
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घटना का विवरण
मृतक वंश फतेहपुर थाना क्षेत्र के गांव कमालपुर का निवासी था, लेकिन पिछले 8-10 वर्षों से अपनी मां और दो बहनों के साथ छुटमलपुर में किराए के कमरे में रह रहा था। शनिवार सुबह जब उसकी बड़ी बहन वंशिका फाइनेंस कंपनी में अपनी नौकरी पर और छोटी बहन अनु ट्यूशन चली गई थी, तभी वंश ने अपने कमरे में पंखे से लटककर जान दे दी। सुबह करीब 8 बजे जब उसकी मां रीता रानी किसी काम से कमरे में गईं, तो बेटे का शव फंदे से लटका देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
वंश के पिता जितेंद्र पेंटर का काम करते हैं, लेकिन माता-पिता के बीच अनबन के कारण परिवार अलग रह रहा था। वंश की मां रीता रानी एक आशा वर्कर हैं। घर की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए वंश न केवल पढ़ाई कर रहा था, बल्कि अपनी मां का हाथ बंटाने के लिए एक प्राइवेट कंपनी में काम भी करता था। वह अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था।
पुलिस की कार्रवाई
शोर सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने तुरंत छात्र को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का लग रहा है, हालांकि अभी तक खुदकुशी के ठोस कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
सार्वजनिक प्रभाव और विश्लेषण
इस घटना ने स्थानीय समाज और युवाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक होनहार छात्र का इस तरह दुनिया छोड़ जाना मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं पर बढ़ते अदृश्य दबाव की ओर इशारा करता है। व्हाट्सएप स्टेटस से यह साफ झलकता है कि छात्र किसी गहरे मानसिक द्वंद्व या निराशा से गुजर रहा था।
UP Prime News विश्लेषण:
आज के दौर में युवाओं में बढ़ता तनाव और अकेलापन एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। पारिवारिक कलह और भविष्य की चिंताएं अक्सर युवाओं को ऐसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर देती हैं। जरूरत है कि परिवार अपने बच्चों के बदलते व्यवहार और सोशल मीडिया एक्टिविटी पर ध्यान दें ताकि समय रहते किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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