UP Police Encounter: बांदा में 13 साल बाद धरा गया 1 लाख का इनामी, मिर्च झोंककर लूटी थी सरकारी राइफल
बांदा, उत्तर प्रदेश:
क्या है 13 साल पुराना फिल्मी मामला?
यह मामला 8 अगस्त 2012 का है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। आरोपी संदीप को चित्रकूट की कर्वी अदालत में पेश करने के बाद पुलिस टीम बांदा मंडल कारागार वापस ले जा रही थी। रास्ते में संदीप ने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया और उनकी सरकारी राइफल लूटकर फरार हो गया। इस दुस्साहसिक घटना के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी, लेकिन वह लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था।
कैसे बिछाया गया जाल?
बांदा के वर्तमान एसपी पलाश बंसल ने पदभार संभालते ही इस पुराने मामले की फाइल खोली और अपराधी को पकड़ने के लिए दो विशेष टीमें तैनात कीं। पिछले चार महीनों की कड़ी मशक्कत और सटीक मुखबिरी के बाद पुलिस को सूचना मिली कि संदीप जंगल के इलाके में अवैध हथियार के साथ घूम रहा है। जब पुलिस ने घेराबंदी की, तो आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली संदीप के पैर में लगी और वह पकड़ा गया। पुलिस ने उसके पास से एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद किए हैं।
जनता पर प्रभाव और पुलिस की कार्रवाई
इस गिरफ्तारी से स्थानीय जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है। लोगों का मानना है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो और कितना भी समय क्यों न बीत जाए, वह कानून के शिकंजे से नहीं बच सकता। एक लाख के इनामी बदमाश का पकड़ा जाना बांदा पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
जर्नलिस्ट एनालिसिस:
यह मुठभेड़ दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अब 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उन अपराधियों को भी ढूंढ निकाल रही है जो दशक भर से ठंडे बस्ते में पड़े मामलों के पीछे छिपे थे। 13 साल बाद एक राइफल लुटेरे का पकड़ा जाना न केवल विभागीय प्रतिष्ठा की बहाली है, बल्कि अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी भी है।

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