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BHU में 18 किमी सोलर केबल चोरी: बिजली उत्पादन 55% घटा, करोड़ों के प्रोजेक्ट पर लगा ग्रहण

 वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), जो कभी अपनी बिजली खुद पैदा कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करता था, आज चोरों के निशाने पर है। बीएचयू परिसर से लगभग 18.5 किलोमीटर लंबी डीसी सोलर केबल चोरी होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बड़ी चोरी की वजह से विश्वविद्यालय की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता घटकर लगभग आधी रह गई है।

सोलर सांकेतिक फोटो :- up prime news







करोड़ों के उपकरण अब 'धूल फांक' रहे हैं

मिली जानकारी के अनुसार, चोरी हुए केबल की कीमत करीब 9.25 से 10 लाख रुपये आंकी जा रही है। लेकिन इसका असली नुकसान कहीं बड़ा है। केबल न होने की वजह से सोलर पैनल से बिजली का प्रवाह रुक गया है, जिससे कैंपस में लगी करोड़ों रुपये की बैटरियां अब बेकार पड़ी हैं। न तो ऊर्जा का भंडारण हो पा रहा है और न ही सप्लाई।

उत्पादन में 55% की भारी गिरावट

आंकड़ों पर नजर डालें तो बीएचयू का सोलर प्लांट अपनी पूरी क्षमता पर रोजाना 27 हजार यूनिट बिजली पैदा करता था। केबल चोरी होने के बाद यह उत्पादन गिरकर महज 13 हजार यूनिट रह गया है। यानी सीधे तौर पर 55 फीसदी की कटौती। सबसे ज्यादा असर कंप्यूटर सेंटर, सेंट्रल लाइब्रेरी और विभागों की छतों पर लगे पैनलों पर पड़ा है। कंप्यूटर सेंटर की पुरानी बिल्डिंग की छत से तो चोरों ने सारे केबल ही काट डाले हैं।

आत्मनिर्भरता से 'खरीददार' बनने तक का सफर

हैरानी की बात यह है कि करीब 10 साल पहले तक बीएचयू अपनी जरूरत की अधिकांश बिजली खुद बनाता था और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचता भी था। आज स्थिति यह है कि आत्मनिर्भर बनने के बजाय विश्वविद्यालय को सरकार से बिजली खरीदनी पड़ रही है।

सार्वजनिक प्रभाव (Public Impact):

एक तरफ सरकार 'पीएम सूर्य घर योजना' के जरिए देश को सौर ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास कर रही है, वहीं बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इतनी बड़ी सुरक्षा चूक गंभीर सवाल खड़े करती है। बिजली उत्पादन घटने का सीधा आर्थिक बोझ संस्थान पर पड़ेगा, जिसका असर अंततः वहां की सुविधाओं और संसाधनों पर देखने को मिल सकता है।

पत्रकारिता विश्लेषण (News Analysis):

18.5 किलोमीटर लंबी केबल का एक दिन में चोरी होना मुमकिन नहीं है। यह घटना बीएचयू प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और मॉनिटरिंग में बड़ी लापरवाही को दर्शाती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में बीएचयू का मॉडल पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।


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