यूपी में तेंदुए का खूनी तांडव: बलरामपुर में युवती की मौत, बहराइच और महाराजगंज में भी भारी दहशत
बलरामपुर/बहराइच/महाराजगंज:
उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में तेंदुए का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा और सबसे दर्दनाक मामला बलरामपुर जिले के भांभर रेंज से सामने आया है, जहाँ नेपाल सीमा से सटे बिशनपुर कोडर गांव में एक 25 वर्षीय युवती की तेंदुए के हमले में जान चली गई।
![]() |
| up prime news |
बलरामपुर: चीखों से गूंज उठा जंगल
मृतका की पहचान 25 वर्षीय कमला के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 9 बजे कमला अपने घर से महज 300 मीटर दूर जंगल के किनारे प्राकृतिक क्रिया (शौच) के लिए गई थी। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे तेंदुए ने अचानक उस पर हमला कर दिया और सीधे उसकी गर्दन दबोच ली। कमला की चीखें सुनकर ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर दौड़ पड़े, लेकिन तब तक तेंदुआ उसे लहूलुहान कर भाग चुका था। गंभीर चोटों के कारण कमला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतका के भाई प्रेमचंद और मां रामरती सहित पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
बहराइच और महाराजगंज में भी दहशत
तेंदुए का यह आतंक केवल बलरामपुर तक सीमित नहीं है। बहराइच के अब्दुल्लागंज रेंज में भी एक तेंदुए ने दो ग्रामीणों को घायल कर दिया है, जिन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। वहीं, महाराजगंज के ठूठीबारी इलाके में एक मादा तेंदुआ अपने दो शावकों के साथ देखी गई है, जिसने बीते कुछ दिनों में कई बकरियों को अपना शिकार बनाया है। वन विभाग की टीम इन इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है।
प्रशासनिक कार्यवाही और जन-जीवन पर असर
वन क्षेत्राधिकारी योगेश कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है और ग्रामीणों को अकेले जंगल की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। एहतियात के तौर पर कुछ प्रभावित इलाकों में स्कूलों की छुट्टी भी कर दी गई है। दहशत का आलम यह है कि लोग अब दिन के उजाले में भी अपने खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।
UP Prime News विश्लेषण:
तराई के जिलों में बढ़ती ये घटनाएं इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का नतीजा हैं। जंगल के किनारों पर बसे गांवों में मूलभूत सुविधाओं, विशेषकर शौचालयों की कमी और गन्ने के खेतों का बढ़ता दायरा तेंदुओं के लिए सुरक्षित छिपने की जगह बन रहा है। प्रशासन को केवल पिंजरे लगाने तक सीमित न रहकर, सीमावर्ती इलाकों में सौर ऊर्जा वाली लाइटों और पुख्ता सुरक्षा घेरे पर काम करने की सख्त जरूरत है।

कोई टिप्पणी नहीं