यूपी: बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर शिवपाल यादव का बड़ा बयान, 'सपा' में आने का दिया खुला ऑफर
लखनऊ (UP Prime News): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर चल रही 'जातीय बैठकों' के दौर ने राज्य के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है। हाल ही में कुशीनगर से बीजेपी विधायक पीएन पाठक के आवास पर हुई ब्राह्मण विधायकों की एक बड़ी बैठक (सहभोज) पर अब विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने तीखा हमला बोला है।
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क्या है पूरा मामला?
विधानसभा सत्र के दौरान लखनऊ के बहुखंडी स्थित विधायक आवास पर करीब तीन दर्जन (36) बीजेपी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) ने एक 'सहभोज' में शिरकत की। इस बैठक में रत्नाकर मिश्रा, शलभमणि त्रिपाठी, और साकेत मिश्रा जैसे कई दिग्गज ब्राह्मण चेहरे शामिल हुए। हालांकि इसे एक अनौपचारिक मुलाकात बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
शिवपाल यादव का तंज और बड़ा ऑफर
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने इस बैठक पर तंज कसते हुए बीजेपी को घेरा है। शिवपाल यादव ने कहा कि बीजेपी के लोग एक तरफ जातिवाद खत्म करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ खुद ही जातियों के आधार पर बैठकें कर रहे हैं।
शिवपाल यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने इन विधायकों को एक बड़ा ऑफर देते हुए कहा, "अगर ब्राह्मण समाज के विधायक वहां उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, तो वे हमारी समाजवादी पार्टी में आ सकते हैं। यहाँ उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा।"
पुरानी बैठकों का दिया हवाला
शिवपाल यादव ने याद दिलाया कि इससे पहले भी लखनऊ में राजपूत और कुर्मी समाज के विधायकों की ऐसी ही अलग-अलग बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी समाज को जातियों में बांटकर राजनीति कर रही है।
सार्वजनिक प्रभाव (Public Impact):
इस तरह की खबरें आम जनता के बीच यह संदेश देती हैं कि चुनाव या सत्र के समय जातीय गोलबंदी तेज हो जाती है। ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाए रखने के लिए जहाँ बीजेपी के भीतर अंदरूनी हलचल है, वहीं सपा इस मौके का फायदा उठाकर खुद को एक समावेशी विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
UP Prime News विश्लेषण:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है। बीजेपी के भीतर इस तरह की 'जातीय पंगत' यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं विधायकों के भीतर अपनी अनदेखी को लेकर सुगबुगाहट है। शिवपाल यादव का ऑफर भले ही एक कटाक्ष हो, लेकिन यह बीजेपी के लिए एक चेतावनी भी है कि विपक्षी दल उनकी अंदरूनी गुटबाजी पर पैनी नज़र रखे हुए हैं।

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