बदायूं में रेबीज की दहशत: संक्रमित भैंस का दूध पीने के बाद अस्पताल में उमड़ी भीड़, विशेषज्ञों ने दी अहम सलाह
बदायूं (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ उझानी क्षेत्र के गांव पिपरौल पुख्ता में रेबीज (Rabies) के डर से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। दरअसल, एक पागल कुत्ते के काटने के कुछ दिनों बाद एक दुधारू भैंस की मौत हो गई, जिसके दूध से बने रायते का सेवन गांव के सैकड़ों लोगों ने एक सामूहिक भोज में किया था।
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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, गांव के निवासी प्रमोद साहू की भैंस को करीब 20 दिन पहले एक पागल कुत्ते ने काट लिया था। उस समय परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि संक्रमण इतना गहरा होगा। कुत्ते की मौत तो कुछ ही दिनों बाद हो गई, लेकिन भैंस सामान्य दिख रही थी।
इसी बीच, गांव के ही ओरन साहू के निधन के बाद 23 दिसंबर को उनकी 'तेरहवीं' का भोज आयोजित किया गया था। इस भोज के लिए प्रमोद साहू की भैंस का दूध भी इस्तेमाल किया गया, जिससे दही जमाकर रायता बनाया गया। इस भोज में गांव और आसपास के करीब 1000 से अधिक लोगों ने भोजन किया था।
भैंस की मौत और बढ़ती दहशत
भोज के चार दिन बाद, गुरुवार को अचानक उस भैंस की भी मौत हो गई। जैसे ही ग्रामीणों को पता चला कि भैंस को पागल कुत्ते ने काटा था, पूरे गांव में रेबीज फैलने की आशंका से दहशत फैल गई। शुक्रवार रात से ही लोग एंबुलेंस बुलाने लगे और शनिवार दोपहर तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) उझानी में करीब 160 लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन (ARV) लगवाने पहुँच गए। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि स्वास्थ्य विभाग को अलग से काउंटर की व्यवस्था करनी पड़ी।
सार्वजनिक प्रभाव (Public Impact):
इस घटना का असर इतना व्यापक है कि गांव के लोग डरे हुए हैं। एंबुलेंस कम पड़ने के कारण लोग निजी वाहनों और ठसाठस भरी एंबुलेंस में बैठकर अस्पतालों तक पहुँच रहे हैं। उझानी के अलावा कुछ लोग पड़ोसी जिले कासगंज के सोरों अस्पताल और निजी क्लीनिकों में भी इलाज के लिए भाग रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: क्या दूध से फैलता है रेबीज?
इस मामले पर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े ने स्पष्ट किया है कि रेबीज का वायरस मुख्य रूप से जानवर की लार (Saliva) में होता है, दूध में नहीं। उनके अनुसार, यदि संक्रमित भैंस का दूध उबालकर इस्तेमाल किया गया है या उससे दही बनाया गया है, तो संक्रमण का खतरा न के बराबर है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सर्वेश कुमार का भी कहना है कि दूध गरम करने और दही जमने की प्रक्रिया में वायरस जीवित नहीं रहता, इसलिए भोज में शामिल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, जो लोग भैंस के सीधे संपर्क में थे (जैसे दूध निकालने वाले या चारा खिलाने वाले), उन्हें सावधानी के तौर पर टीका जरूर लगवाना चाहिए।
UP Prime News विश्लेषण:
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य और रेबीज के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शाती है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दूध से खतरा कम है, लेकिन इस सामूहिक दहशत ने स्वास्थ्य सेवाओं पर अचानक दबाव बढ़ा दिया है। प्रशासन को चाहिए कि वह अफवाहों को रोकने के लिए गांव में जागरूकता अभियान चलाए।

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