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गाजीपुर डबल मर्डर केस: पुलिस की बड़ी लापरवाही, इंस्पेक्टर और दरोगा सस्पेंड

 उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां गहमर थाना क्षेत्र के खेलूराय पट्टी गांव में आपसी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया। इस घटना में दो युवकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जबकि एक अन्य युवक अभी भी लापता है। इस पूरे मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही उजागर होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कोतवाल समेत चार पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की है।








क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, खेलूराय पट्टी और खेमनराय पट्टी के दो गुटों के बीच पिछले तीन महीनों से वर्चस्व की जंग चल रही थी। बुधवार की आधी रात को यह विवाद चरम पर पहुंच गया। आरोप है कि हमलावरों ने विक्की सिंह (23) और सौरभ सिंह (24) को पहले लाठी-डंडों से पीटा और फिर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए शवों को पास के ही एक पोखरे में फेंक दिया गया। इस घटना में उनका तीसरा साथी अंकित सिंह (25) अभी भी लापता है, जिसकी तलाश के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें जुटी हुई हैं।

पुलिस पर क्यों गिरी गाज?

UP Prime News की पड़ताल में सामने आया कि इस हत्याकांड की नींव सितंबर महीने में ही पड़ गई थी। 3 सितंबर और फिर 26 सितंबर को भी इन दोनों गुटों के बीच पथराव और फायरिंग हुई थी। आरोप है कि उस समय के थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और पीड़ितों पर दबाव बनाकर तहरीर तक बदलवा दी थी। इसी लापरवाही का नतीजा यह दोहरा हत्याकांड बना।

डीआईजी वैभव कृष्ण के निर्देश पर एसपी डॉ. ईरज राजा ने कार्रवाई करते हुए:

गहमर कोतवाल दीनदयाल पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया।

तत्कालीन कोतवाल और वर्तमान में सैदपुर थाना प्रभारी शैलेश मिश्रा को निलंबित (Suspend) कर दिया।

उपनिरीक्षक राजीव पांडेय और पन्नालाल यादव को भी निलंबित कर दिया गया है।

गहमर कोतवाली की कमान अब मोहम्मदाबाद कोतवाल प्रमोद कुमार को सौंपी गई है।

जनता का आक्रोश और प्रभाव

गुरुवार सुबह जब ग्रामीणों ने सड़क और दीवारों पर खून के निशान देखे, तो इलाके में तनाव फैल गया। परिजनों ने शवों को नेशनल हाईवे-124 पर रखकर जाम लगा दिया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे। घंटों चले विरोध प्रदर्शन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन पर जाम खोला गया। इस घटना से स्थानीय निवासियों में पुलिस के प्रति अविश्वास और सुरक्षा को लेकर डर का माहौल है।

UP Prime News विश्लेषण:

यह मामला स्पष्ट करता है कि यदि पुलिस छोटे विवादों और शुरुआती शिकायतों पर समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई करती, तो आज दो घरों के चिराग नहीं बुझते। पुलिसिंग में 'टालमटोल' का रवैया अक्सर बड़े अपराधों को जन्म देता है। विभाग द्वारा की गई यह निलंबन की कार्रवाई अन्य कर्मियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि ड्यूटी में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।








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