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उन्नाव केस: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता का बड़ा बयान, उधर कुलदीप सेंगर की बेटी ने सोशल मीडिया पर बयां किया अपना दर्द

 [उन्नाव (उत्तर प्रदेश)]:

उन्नाव के चर्चित पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद दोनों पक्षों की ओर से बड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मामले की पीड़िता ने देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। पीड़िता ने स्पष्ट किया कि वह न्याय के लिए अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष जारी रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी अपनी नहीं, बल्कि हर उस महिला की है जो शोषण का शिकार हुई है।

(Unnao case) kuldeep sengar







पीड़िता ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के तहत उन्हें और उनके परिवार को सीआरपीएफ (CRPF) सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन 3 अप्रैल 2025 को उनके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा हटा ली गई। पीड़िता का दावा है कि उन्हें और उनके मददगारों को अभी भी जान का खतरा है, इसलिए उन्होंने सरकार से सीआरपीएफ सुरक्षा बहाल करने की मांग की है।

दूसरी तरफ, कुलदीप सेंगर के खेमे में इस फैसले के बाद मायूसी देखी जा रही है। सजा के निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद सेंगर की बेटी इशिता सेंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक मार्मिक पत्र साझा किया है। इशिता ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि पिछले आठ वर्षों से उनका परिवार धैर्यपूर्वक न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन अब उनका भरोसा डगमगा रहा है। उन्होंने अपनी पहचान को केवल 'विधायक की बेटी' के लेबल तक सीमित किए जाने और सोशल मीडिया पर मिलने वाली धमकियों पर भी गहरा दुख व्यक्त किया है।

खबर का बैकग्राउंड:
जुलाई 2017 में उन्नाव बलात्कार कांड सामने आया था, जिसमें पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को आरोपी बनाया गया था। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जुलाई 2019 में रायबरेली में पीड़िता की कार का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उसके परिजनों की मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे दिल्ली ट्रांसफर किया था। हाल ही में हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने से सेंगर की जेल से बाहर आने की उम्मीदों को झटका लगा है।


पब्लिक इम्पैक्ट:
हाई-प्रोफाइल मामलों में न्यायपालिका के फैसलों का आम जनता पर गहरा असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख संदेश देता है कि गंभीर अपराधों में कानूनी प्रक्रिया बेहद सख्त रहती है। वहीं, सुरक्षा की मांग और आरोपी पक्ष की ओर से उठाए गए सामाजिक बहिष्कार के मुद्दे सुरक्षा व्यवस्था और सोशल मीडिया ट्रायल की नैतिकता पर नई बहस छेड़ सकते हैं।


UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली की पेचीदगियों और पीड़िता की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। एक तरफ न्याय की जीत का भरोसा है, तो दूसरी तरफ अदालती फैसलों के बीच फंसे परिवारों का अपना नजरिया है।

उन्नाव | UP Prime News
Published: 30 Dec 2025 | 11:18 AM IST
By UP Prime News Desk



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