कुंडा विधायक राजा भैया की पत्नी और बेटियों के नाम वोटर लिस्ट से गायब, भानवी सिंह ने सीएम योगी से की शिकायत
उत्तर प्रदेश (प्रतापगढ़):
प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सामने आया है। यहाँ के विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह और उनकी दो बेटियों, राघवी कुमारी व विजय राजेश्वरी कुमारी के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। यह कार्रवाई चुनाव आयोग द्वारा कराए गए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के बाद की गई है।
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| फोटो : UP prime news |
मतदाता सूची से नाम हटने की जानकारी मिलते ही भानवी सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को 'खुला पक्षपात' और प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव का परिणाम बताया है। इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। भानवी सिंह ने मांग की है कि उनके संवैधानिक मताधिकार को तत्काल बहाल किया जाए और इस गड़बड़ी की जांच हो।
भानवी सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रमाण भी साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की मतदाता सूची में उनका नाम मतदान केंद्र संख्या 87 (बेंती) के वार्ड नंबर 15 में दर्ज था। वह साल 2003 से लगातार कुंडा क्षेत्र की पंजीकृत मतदाता रही हैं। उनका आरोप है कि बिना किसी सूचना या ठोस आधार के अचानक नई अंतरिम सूची से उनका और उनकी बेटियों का नाम हटाना समझ से परे है। फिलहाल इस मामले ने कुंडा के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
खबर का बैकग्राउंड:
राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद और कानूनी मामले चल रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण का अभियान चलाया गया था। भानवी सिंह का दावा है कि उनके पास कुंडा का स्थायी निवासी होने के सभी दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं।
पब्लिक इम्पैक्ट:
मतदाता सूची से नाम कटने जैसी घटनाएं चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती हैं। जब किसी रसूखदार परिवार के सदस्यों के नाम बिना स्पष्ट कारण के सूची से बाहर हो जाते हैं, तो आम जनता में अपने मताधिकार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है। यह प्रशासन की निष्पक्ष कार्यप्रणाली के प्रति जनविश्वास को प्रभावित कर सकता है।
UP Prime News एनालिसिस:
निर्वाचन प्रक्रिया में मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन हाई-प्रोफाइल मामलों में ऐसी त्रुटियां राजनीतिक रंग ले लेती हैं। प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनी रहे।
प्रतापगढ़ | UP Prime News
Published: 23 जनवरी, 2026 | 02:49 PM IST
By UP Prime News Desk

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