यूपी अभ्युदय योजना भर्ती घोटाला: आईएएस-पीसीएस कोचिंग में फर्जीवाड़ा, अधिकारियों और आउटसोर्सिंग कंपनी पर गिरेगी गाज
लखनऊ (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना' के तहत हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है। आईएएस और पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी कराने के लिए नियुक्त किए गए कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती में नियमों को ताक पर रखा गया। जांच में खुलासा हुआ है कि आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से हुई इन नियुक्तियों में भारी अनियमितता बरती गई है, जिसके बाद अब कई जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनी पर सख्त कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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| सांकेतिक फोटो :- up prime news |
विभाग द्वारा गठित तीन अलग-अलग कमेटियों की जांच रिपोर्ट में यह बात साबित हो गई है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में 60 हजार रुपये मासिक मानदेय पर रखे गए 69 कोर्स कोऑर्डिनेटरों में से 48 पूरी तरह अयोग्य थे। इस पद के लिए पीसीएस की मुख्य परीक्षा पास करना अनिवार्य योग्यता थी, लेकिन बिना अर्हता पूरी किए ही चहेतों को नौकरी दे दी गई। अब जब मामला खुला है, तो जिम्मेदार अधिकारी अपनी लापरवाही छिपाने के लिए सारा दोष आउटसोर्सिंग कंपनी 'अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड' पर मढ़ रहे हैं, जबकि भर्ती प्रक्रिया की निगरानी का जिम्मा विभागीय कमेटियों के पास ही था।
इस घोटाले में तत्कालीन संयुक्त निदेशक आरके सिंह, एसके विसेन और जिला समाज कल्याण अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें से कुछ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं तो कुछ लंबी छुट्टी पर हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि सिर्फ कोर्स कोऑर्डिनेटर ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती में भी गड़बड़ी की आशंका है, जिसके अभिलेखों का सत्यापन अब नए सिरे से किया जाएगा। फिलहाल विभाग अयोग्य पाए गए लोगों को हटाने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
खबर का बैकग्राउंड:
करीब दो साल पहले यूपी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग देने के लिए अभ्युदय योजना शुरू की थी। इसके संचालन के लिए हर जिले में एक कोर्स कोऑर्डिनेटर रखा जाना था। नियुक्ति का जिम्मा एक निजी कंपनी को दिया गया था, लेकिन निगरानी में लापरवाही के चलते यह घोटाला पनपा।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घोटाले का सीधा असर उन हजारों गरीब छात्रों पर पड़ेगा जो इस योजना के भरोसे अपनी तैयारी कर रहे थे। अयोग्य कोऑर्डिनेटरों की वजह से कोचिंग की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। साथ ही, जनता के टैक्स का पैसा (60 हजार रुपये प्रति माह वेतन) गलत हाथों में जाने से सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला स्पष्ट करता है कि सरकारी योजनाओं में आउटसोर्सिंग के नाम पर किस तरह निगरानी तंत्र फेल हो रहा है। अधिकारियों का केवल कंपनी पर दोष मढ़ना काफी नहीं है; चयन समिति में शामिल जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो सके।
लखनऊ | UP Prime News
Published: January 08, 2026 | 11:47 AM IST
By UP Prime News Desk

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