रामपुर: पहचान बदलकर सरकारी टीचर बनी पाकिस्तानी महिला, फर्जीवाड़े के आरोप में FIR दर्ज
रामपुर (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने बेसिक शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक महिला पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद, अपनी पहचान छिपाकर और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे वर्षों तक सरकारी शिक्षिका के पद पर नौकरी करती रही। मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने महिला को बर्खास्त कर दिया है और पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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| पाकिस्तानी महिला फोटो :-up prime news |
पुलिस अधीक्षक (SP) रामपुर, अनुराग सिंह के मुताबिक, आरोपी महिला की पहचान माहिरा अख्तर उर्फ फरजाना के रूप में हुई है। वह थाना अजीम नगर क्षेत्र के ग्राम कुम्हारिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात थी। जांच में पाया गया कि महिला मूल रूप से पाकिस्तानी नेशनल है, लेकिन उसने खुद को भारतीय नागरिक बताकर बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल की थी। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336, 338 के तहत धोखाधड़ी और कूट रचना का मामला दर्ज किया है।
आरोपों के अनुसार, महिला ने नौकरी पाने के लिए फर्जी निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करवाए थे। यह मामला तब संज्ञान में आया जब उसकी नागरिकता को लेकर शिकायतें हुईं और विभागीय जांच बैठाई गई। जांच में दोषी पाए जाने पर उसे पहले निलंबित किया गया और फिर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। अब पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि आखिर इतने वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा और इसमें किन-किन लोगों की मिलीभगत हो सकती है।
खबर का बैकग्राउंड:
जानकारी के मुताबिक, महिला 1979 में शादी के बाद पाकिस्तान चली गई थी और वहां की नागरिकता लेकर 'माहिरा' बन गई थी। तलाक के बाद वह पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लौटी और 'फरजाना' बनकर रहने लगी। 1985 में उसने रामपुर में दूसरी शादी की और यहीं अपनी शिक्षा व बीटीसी (BTC) की ट्रेनिंग पूरी की। 1991 में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर उसने सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घटना ने सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन (Verification) सिस्टम पर आम जनता का भरोसा डगमगा दिया है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक विदेशी नागरिक सुरक्षा एजेंसियों और शिक्षा विभाग की आंखों में धूल झोंककर इतने लंबे समय तक सरकारी खजाने से वेतन कैसे लेती रही। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर विषय बन गया है।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला 1990 के दशक में दस्तावेज़ सत्यापन की ढीली प्रक्रिया को उजागर करता है। भले ही अब कार्रवाई हो गई है, लेकिन यह प्रशासन के लिए एक सबक है कि पुराने कर्मचारियों के दस्तावेजों की भी समय-समय पर पुनः जांच होनी चाहिए ताकि ऐसे 'स्लीपर' फर्जीवाड़ों को पकड़ा जा सके।
RAMPUR | UP Prime News
Published: January 08, 2026 | 09:35 AM IST
By UP Prime News Desk

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