[उत्तर प्रदेश]:
केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार की गईं सेंट्रल जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर और आईआरएस (IRS) अधिकारी प्रभा भंडारी के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को सीबीआई की टीम ने शहर के नमो होम्स स्थित उनके फ्लैट (नंबर ए-311) की सघन तलाशी ली। बताया जा रहा है कि जब अधिकारी ने फ्लैट की चाबी देने से इनकार कर दिया, तो टीम ने मैकेनिक बुलवाकर ताला तुड़वाया और करीब चार घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया।
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| (IRS) अधिकारी प्रभा भंडारी फोटो :- up prime news |
तलाशी के दौरान सीबीआई को प्रभा भंडारी के आवास से लगभग 30 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और अलमारियों से करीब डेढ़ लाख रुपये की नगदी मिली है। इसके अलावा, टीम ने मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। यह कार्रवाई बुधवार को हुई उनकी गिरफ्तारी के बाद के घटनाक्रम का हिस्सा है, जिसमें उन पर 70 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था।
सीबीआई की जांच के अनुसार, यह पूरा मामला 18 दिसंबर को 'जय दुर्गा हार्डवेयर' और 'जय अम्बे प्लाईवुड' के ठिकानों पर की गई जीएसटी छापेमारी से जुड़ा है। आरोप है कि छापेमारी के दौरान मिली गड़बड़ियों और चोरी को रफा-दफा करने के बदले में मोटी रकम वसूलने की डील की गई थी। इस मामले में प्रभा भंडारी के साथ-साथ एक वकील और अन्य बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है। सीबीआई ने अब तक ग्वालियर, दिल्ली और झांसी स्थित विभिन्न ठिकानों से कुल 90 लाख रुपये नगद, संपत्ति के दस्तावेज और चांदी की ईंटें बरामद की हैं।
खबर का बैकग्राउंड:
यह मामला तब शुरू हुआ जब जीएसटी विभाग ने दिसंबर के मध्य में दो बड़ी फर्मों पर छापेमारी की थी। जांच में सामने आया कि आईआरएस अधिकारी प्रभा भंडारी ने कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से इन फर्मों से 70 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाकर बुधवार को मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पब्लिक इम्पैक्ट:
सरकारी विभागों में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर लगाम लगने की उम्मीद जगती है। टैक्स चोरी और रिश्वतखोरी जैसे मामले सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के भरोसे को प्रभावित करते हैं। सीबीआई की इस मुस्तैदी से भ्रष्ट अधिकारियों के बीच कड़ा संदेश गया है।
UP Prime News एनालिसिस:
जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही यह निरंतर कार्रवाई प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उच्च स्तरीय अधिकारियों की संलिप्तता यह दर्शाती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं, जिसे उखाड़ने के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।
[उत्तर प्रदेश] | UP Prime News
Published: January 02, 2026 | 11:09 PM IST
By UP Prime News Desk
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