कफ सिरप तस्करी कांड: सौरभ त्यागी निकला दूसरा मास्टरमाइंड, 180 करोड़ के काले साम्राज्य का खुलासा
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश में नशीले कफ सिरप की तस्करी के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए जांच एजेंसियों ने सौरभ त्यागी को इस नेटवर्क का दूसरा मास्टरमाइंड घोषित किया है। सौरभ त्यागी ने मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के समानांतर अपना एक अलग गिरोह खड़ा कर लिया था। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने अपनी पांच प्रमुख दवा कंपनियों—आरएस फार्मा, एवी फार्मा, मेडेरॉन हेल्थ केयर, वान्या एंटरप्राइजेज और एसबी ट्रेडर्स—के माध्यम से 180 करोड़ रुपये से अधिक की कफ सिरप की बोतलें अवैध रूप से सप्लाई की थीं।
![]() |
| कफ सिरप कांड फोटो :-up prime news |
सौरभ त्यागी का यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार बांग्लादेश तक जुड़े हुए थे। गाजियाबाद पुलिस ने पूर्व में कार्रवाई करते हुए सौरभ के ट्रकों से 20 लाख रुपये नकद और करीब 1 लाख 57 हजार 350 कोडीन युक्त सिरप की बोतलें बरामद की थीं। इस गिरोह में गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी सौरभ के साथ धर्मेंद्र सिंह, दीपू यादव, सुशील यादव, अंबुज कुमार और कई अन्य सहयोगी शामिल थे। एसटीएफ की पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने इस पूरे सिंडिकेट की कार्यप्रणाली का खुलासा किया है।
अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी अपनी पैनी नजर गड़ा दी है। ईडी इस पूरे प्रकरण में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है। बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और अमित टाटा के संपर्क वाली दवा कंपनियों के खातों को खंगाला जा रहा है। जांच में पता चला है कि आलोक सिंह ने एक आलीशान कोठी अपनी पत्नी के नाम पर बनाई है, जिसके लिए कोई लोन नहीं लिया गया। ईडी अब आलोक और उसके परिवार के बैंक खातों की जांच कर रही है और आय का स्रोत न मिलने पर संपत्ति जब्त करने की तैयारी में है। वहीं, मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल वर्तमान में दुबई में छिपा है, जिसके प्रत्यर्पण के लिए एसआईटी लगातार प्रयास कर रही है।
खबर का बैकग्राउंड:
यह मामला उत्तर प्रदेश और सीमावर्ती देशों में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़ा है। वैध फार्मा लाइसेंस की आड़ में इन दवाओं को नशे के कारोबार के लिए ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। पूर्व में शुभम जायसवाल को इसका मुख्य चेहरा माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर सौरभ त्यागी के एक स्वतंत्र और विशाल नेटवर्क का पता चला।
पब्लिक इम्पैक्ट:
दवाओं की तस्करी के इस बड़े नेटवर्क के खुलासे से समाज में फैल रहे नशे के कारोबार पर लगाम लगेगी। साथ ही, फार्मा सेक्टर में छिपे अपराधियों के पकड़े जाने से आम जनता का स्वास्थ्य प्रणालियों पर भरोसा बढ़ेगा। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से उन लोगों में डर पैदा होगा जो कानूनी व्यापार की आड़ में अवैध गतिविधियां संचालित करते हैं।
UP Prime News एनालिसिस:
फार्मा कंपनियों का इस्तेमाल कर इतनी बड़ी राशि का अवैध ट्रांजेक्शन सिस्टम की खामियों और जांच एजेंसियों की सतर्कता, दोनों को दर्शाता है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच इस केस के वित्तीय आधार को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
गाजियाबाद/लखनऊ | UP Prime News
Published: January 12, 2026 | 08:36 AM IST
By UP Prime News Desk

कोई टिप्पणी नहीं