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मेरठ दलित महिला हत्याकांड: आरोपी पारस सोम 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया, बैरक नंबर 14 में फूट-फूटकर रोया

 उत्तर प्रदेश (मेरठ):

मेरठ के बहुचर्चित दलित महिला हत्याकांड के मुख्य आरोपी पारस सोम को रविवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया है। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच हुई इस पेशी के बाद आरोपी को जेल की 'मुलाहिजा' बैरक संख्या 14 में रखा गया है। जेल प्रशासन के अनुसार, जेल में पहली रात पारस काफी भावुक नजर आया। बताया जा रहा है कि रात का खाना (दाल, सब्जी, रोटी और चावल) खाते समय वह अपने परिवार को याद कर फूट-फूटकर रोने लगा।

मुख्य आरोपी पारस सोम फोटो :- up prime news








अदालती कार्यवाही के दौरान मेरठ कचहरी परिसर किसी छावनी में तब्दील नजर आया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और सीओ सरधना आशुतोष कुमार के नेतृत्व में आठ थानों की पुलिस फोर्स और पुलिस लाइन की टीमों को तैनात किया गया था। पुलिस ने इस दौरान मामले से जुड़ी रूबी नामक महिला को भी गुप्त तरीके से कोर्ट में पेश कर उसके बयान दर्ज कराए। इससे पहले रविवार सुबह रूबी और आरोपी पारस दोनों का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।

सुरक्षा कारणों से जब पारस सोम को कोर्ट लाया गया, तो पुलिस ने उसे रस्सियों के घेरे में रखा था और पहचान छिपाने के लिए उसका चेहरा कंबल और मफलर से ढका हुआ था। जेलर डॉ. हरवंश पांडेय ने बताया कि आरोपी अपने परिवार से न मिल पाने के कारण परेशान दिख रहा था, जिसके चलते जेल के डॉक्टर से उसका चेकअप भी कराया गया है। फिलहाल आरोपी को कड़ी निगरानी में रखा गया है।

खबर का बैकग्राउंड:

यह मामला एक दलित महिला के अपहरण और उसकी हत्या से जुड़ा है, जिसमें पारस सोम को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने गहन छानबीन के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया था। वहीं, आरोपी ने प्राथमिक पूछताछ और कोर्ट परिसर में खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया था कि उसने हत्या नहीं की है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस तरह के गंभीर मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया से समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ता है। महिला सुरक्षा और दलित उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासन की सख्ती असामाजिक तत्वों के लिए एक कड़ा संदेश है।

UP Prime News एनालिसिस:

मामले में भारी पुलिस बल की तैनाती और न्यायिक हिरासत की प्रक्रिया दर्शाती है कि प्रशासन किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने नहीं देना चाहता। अब पूरी जांच रूबी के बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी है।

मेरठ | UP Prime News

Published: 11 जनवरी, 2026 | 10:54 PM IST

By UP Prime News Desk

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