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कानपुर गैंगरेप: यूट्यूबर जेल भेजा गया, आरोपी दरोगा फरार; मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि और 6 लाइन की रिपोर्ट लिखकर मामला दबाने वाले इंस्पेक्टर पर सवाल

 कानपुर (उत्तर प्रदेश):

कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में किशोरी के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस विभाग और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी यूट्यूबर शिवबरन यादव को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेज दिया है, जबकि घटना में नामजद आरोपी दरोगा अमित मौर्य अभी भी फरार है। किशोरी की मेडिकल रिपोर्ट में सेक्शुअल असॉल्ट (यौन हमला) की पुष्टि होने और ऐसे साक्ष्य मिलने के बाद कि डॉक्टरों ने दुष्कर्म की आशंका से इनकार नहीं किया है, पुलिस ने अब मामले में गैंगरेप की धाराएं बढ़ा दी हैं।

सांकेतिक फोटो :- up prime news







इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच में सामने आया है कि सचेंडी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने घोर लापरवाही बरतते हुए गैंगरेप जैसी गंभीर घटना की रिपोर्ट महज छह लाइनों में लिखकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की थी। इस लापरवाही के उजागर होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मामले की जांच अब एडीसीपी कपिल देव सिंह को सौंपी गई है। पुलिस की दो टीमें आरोपी दरोगा अमित मौर्य की तलाश में प्रयागराज और वाराणसी में छापेमारी कर रही हैं, जबकि लखनऊ में भी दबिश दी गई है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि घटना में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो कार आरोपी दरोगा अमित मौर्य की ही है, जिसे उसने करीब दो महीने पहले 5 नवंबर 2025 को खरीदा था। गुरुवार को पीड़िता का कोर्ट में कलमबंद (धारा 164) बयान दर्ज कराया गया। अपने 9 मिनट के बयान में किशोरी ने स्पष्ट रूप से दरोगा अमित मौर्य और यूट्यूबर का नाम लिया है। साथ ही, किशोरी ने मौके पर एक आरपीएफ (RPF) इंस्पेक्टर के भी मौजूद होने की बात कही है, जिसने मामले को और पेचीदा बना दिया है। पीड़िता के भाई का आरोप है कि पुलिस अपने विभाग के आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है और परिवार को सुलह करने के लिए लगातार धमकियां मिल रही हैं।

खबर का बैकग्राउंड:
सचेंडी क्षेत्र की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी को यूट्यूबर शिवबरन यादव ने काली स्कॉर्पियो में खींचकर झांसी रेलवे लाइन के किनारे उसके साथ दुष्कर्म किया था। पीड़िता के अनुसार, इस घिनौने कृत्य में दरोगा भी शामिल था। शुरुआत में पुलिस ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, लेकिन उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद गैंगरेप की धाराएं जोड़ी गईं।


पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घटना ने आम जनता के बीच पुलिस की छवि को धूमिल किया है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और थानेदार रिपोर्ट दबाने में लग जाएं, तो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है। इससे समाज में डर का माहौल बनता है और पीड़ित परिवारों का कानून व्यवस्था से भरोसा डगमगाता है। लोग अब इस मामले में त्वरित न्याय और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि पुलिस सिस्टम के भीतर छिपे भ्रष्टाचार और 'अपने को बचाने' की मानसिकता को उजागर करता है। मेडिकल रिपोर्ट और पीड़ित के बयान के बावजूद आरोपी दरोगा का पकड़ से बाहर होना जांच एजेंसियों की मुस्तैदी पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

कानपुर (उत्तर प्रदेश) | UP Prime News
Published: 9 January 2026 | 08:04 AM IST
By UP Prime News Desk

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