माघ मेला 2026: प्रयागराज में मकर संक्रांति पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, करीब 2.5 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम पहुंचने का अनुमान
उत्तर प्रदेश (प्रयागराज):
तीर्थराज प्रयागराज में माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व 'मकर संक्रांति' पर आस्था की भारी भीड़ उमड़ रही है। गुरुवार तड़के से ही कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की परवाह किए बिना लाखों श्रद्धालु और कल्पवासी संगम तट पर पहुंचकर पवित्र डुबकी लगा रहे हैं। मेला प्रशासन का अनुमान है कि आज के मुख्य स्नान पर्व पर दो से ढाई करोड़ श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में स्नान करेंगे। आंकड़ों के अनुसार, मकर संक्रांति से एक दिन पहले बुधवार को ही करीब 75 लाख से अधिक लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं।
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| फोटो : up prime news |
भीड़ प्रबंधन के लिए इस बार प्रशासन ने विशेष 'हाईटेक रिस्पांस प्लान' लागू किया है। संगम क्षेत्र में कुल 24 स्नान घाट बनाए गए हैं, हालांकि नदी की धारा में बदलाव के कारण कुछ घाटों की स्थिति में आंशिक संशोधन भी किया गया है। श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मेला क्षेत्र में 12 कंपनी पीएसी, 7 कंपनी बाढ़ राहत पीएसी, NDRF की 2 टीमें और SDRF के साथ-साथ एंटी माइन और ATS की टीमें भी तैनात हैं। सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए 6169 दरोगा व सिपाही और 1000 रिक्रूट आरक्षियों की ड्यूटी लगाई गई है।
ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए आधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। शहर के 8 संवेदनशील चौराहों को 'जाम संभावित' चिह्नित कर वहां क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तैनात की गई है। जिलाधिकारी मनीष वर्मा और मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने जल पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर है कि स्नान घाटों और मुख्य मार्गों पर भीड़ जमा न हो, ताकि किसी भी प्रकार की पैनिक स्थिति से बचा जा सके।
खबर का बैकग्राउंड:
प्रयागराज का माघ मेला सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा है, जहां देश-दुनिया से लोग एक माह के कल्पवास के लिए आते हैं। मकर संक्रांति का स्नान इस मेले के सबसे बड़े पर्वों में से एक माना जाता है, जो सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। इस वर्ष नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव और कड़ाके की ठंड प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रयागराज जाने वाले कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। प्रशासन की 'नो-स्लीपिंग' पॉलिसी (घाटों पर न सोने देने का नियम) और वायरलेस सेट के अनिवार्य प्रयोग से भीड़ के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। हालांकि, कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन घाटों पर की गई व्यवस्थाएं भक्तों को सुविधा प्रदान कर रही हैं।
UP Prime News एनालिसिस:
इतने विशाल जनसमूह का प्रबंधन करना किसी भी प्रशासन के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा है। तकनीक और मैनपावर के सही तालमेल के माध्यम से प्रशासन सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
प्रयागराज | UP Prime News
Published: 15 Jan 2026 | 05:45 AM IST
By UP Prime News Desk
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