संभल (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 में हुई भीषण हिंसा के मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (CO) अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाल अनुज तोमर और करीब 15 से 20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने यह आदेश एक पीड़ित युवक के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है।
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| फोटो : up prime mews |
यह मामला नखासा क्षेत्र के खग्गू सराय निवासी आलम से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, 24 नवंबर 2024 को जब शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़की थी, तब आलम बेकरी उत्पाद बेचने के लिए निकला था। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उसी दौरान वह पुलिस की गोली का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। गिरफ्तारी के डर से परिजनों ने उसका इलाज निजी अस्पताल में कराया था। इस मामले को लेकर अधिवक्ता चौधरी अख्तर सादेन ने 4 फरवरी 2025 को कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद अब आदेश आया है।
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि हिंसा के दौरान घायलों और मृतकों के शरीर से जो गोलियां मिलीं, वे .32 बोर की थीं। पुलिस विभाग इस बोर के हथियारों का इस्तेमाल नहीं करता है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम और बैलिस्टिक रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे।
खबर का बैकग्राउंड:
24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद के तहत कोर्ट के आदेश पर सर्वे किया जा रहा था। इस दौरान इलाके में भारी हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें चार युवकों की जान चली गई थी और कई पुलिसकर्मी व प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए थे। शासन द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग भी इस मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को सौंप चुका है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
अदालत के इस फैसले से जनता के बीच यह संदेश गया है कि कानून की नजर में पुलिस और प्रशासन भी जवाबदेह हैं। यह आदेश उन परिवारों के लिए कानूनी उम्मीद की किरण है जो हिंसा में प्रभावित हुए थे। हालांकि, पुलिस के तकनीकी दावों (बोर का अंतर) और अदालती आदेश के बीच के इस टकराव से मामले में कानूनी पेचीदगियां बढ़ सकती हैं।
UP Prime News एनालिसिस:
यह आदेश पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, वहीं पुलिस द्वारा बैलिस्टिक रिपोर्ट का हवाला देना मामले को चुनौतीपूर्ण बनाता है। अब यह कानूनी लड़ाई साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के इर्द-गिर्द सिमट जाएगी।
संभल, उत्तर प्रदेश | UP Prime News
Published: 13 जनवरी, 2026 | 11:14 PM IST
By UP Prime News Desk
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