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यूपी में टीबी उन्मूलन के लिए महाभियान: फरवरी से 100 दिनों तक चलेगा सघन रोगी खोज कार्यक्रम

 लखनऊ (उत्तर प्रदेश):

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फरवरी महीने से 100 दिवसीय 'विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान' शुरू करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) और अपर निदेशकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक मरीजों की पहचान कर जल्द से जल्द उनका इलाज शुरू करना है।

फोटो : up prime news







इस बार अभियान को व्यापक बनाने के लिए इसमें सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, प्रधानों और पार्षदों जैसे जनप्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल के अनुसार, सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे दो माह के भीतर सांसदों के साथ जिला स्तर पर अभियान की समीक्षा करें। इस अभियान में 'माई भारत' वॉलंटियर्स, पंजीकृत 'निक्षय मित्रों' और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद भी ली जाएगी।

मरीजों की खोज के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्राइमरी स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जेलों और मलिन बस्तियों (slums) में सघन टीबी स्क्रीनिंग के आदेश दिए गए हैं ताकि संक्रमण की कड़ी को तोड़ा जा सके।

खबर का बैकग्राउंड:

उत्तर प्रदेश में सघन टीबी खोज अभियान दिसंबर 2024 से निरंतर चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2015 की तुलना में वर्तमान में प्रति एक लाख व्यक्तियों पर मरीजों की संख्या में 17 प्रतिशत की कमी आई है। साथ ही, टीबी के कारण होने वाली मृत्यु दर में भी 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इन्ही सकारात्मक परिणामों को देखते हुए सरकार अब फरवरी से इस 100 दिवसीय विशेष अभियान को फिर से शुरू करने जा रही है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस अभियान से आम जनता, विशेषकर ग्रामीण और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। घर-घर स्क्रीनिंग और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से बीमारी को लेकर फैला सामाजिक डर (stigma) कम होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी इस बीमारी के लक्षणों और बचाव के प्रति सजग बनेगी, जिससे भविष्य में संक्रमण की दर में भारी कमी आने की संभावना है।

UP Prime News एनालिसिस:

स्वास्थ्य ढांचे के साथ जनप्रतिनिधियों का समन्वय सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका है। स्थानीय स्तर पर प्रधानों और पार्षदों के शामिल होने से टीबी के छिपे हुए मामलों को सामने लाने में मदद मिलेगी, जो अक्सर जागरूकता की कमी के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं।

[लखनऊ] | UP Prime News

Published: 16 Jan 2026 | 10:08 AM IST

By UP Prime News Desk


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