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मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर एक्शन: अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा तोड़े जाने पर बढ़ा विवाद, संजय राउत ने की कड़ी आलोचना

 वाराणसी (उत्तर प्रदेश):

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार कार्य के दौरान हुई बुलडोजर कार्रवाई ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस कार्रवाई के दौरान घाट पर स्थित कुछ प्राचीन मढ़ियों और मूर्तियों को हटाया गया, जिनमें महान शासक अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा भी शामिल थी। प्रतिमा के कथित तौर पर खंडित होने की खबरों के बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

फोटो : up prime news









शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे 'दुखद' करार दिया है। राउत ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर इस देश की बहुत बड़ी विरासत हैं और उन्होंने काशी के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मांग की है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करें। राउत ने जोर देकर कहा कि अहिल्याबाई का अपमान केवल महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान है।

वहीं, इस घटना के बाद इंदौर राजपरिवार के प्रतिनिधि और खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होलकर ने वाराणसी का दौरा किया। उन्होंने मणिकर्णिका घाट की पवित्र मिट्टी को माथे पर लगाकर महारानी की विरासत को संरक्षित करने का संकल्प दोहराया। इस दौरान घाट पर सुरक्षा के मद्देनजर पीएसी (PAC) के जवानों की भारी तैनाती की गई थी। अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह तय हुआ है कि रानी मां की जो दो मूर्तियां सुरक्षित मिली हैं, उन्हें जल्द ही पास के तारकेश्वर मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

खबर का बैकग्राउंड:

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है, जिसके तहत पुरानी और जर्जर संरचनाओं को हटाया जा रहा है। रानी अहिल्याबाई होलकर ने 18वीं शताब्दी में काशी विश्वनाथ मंदिर और मणिकर्णिका घाट सहित कई अन्य घाटों का पुनर्निर्माण कराया था, जिसके कारण उनकी विरासत के प्रति लोगों में गहरी श्रद्धा है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस घटना का आम जनता और विशेष रूप से महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश के लोगों की भावनाओं पर गहरा असर पड़ा है। अहिल्याबाई होलकर को एक न्यायप्रिय और धर्मपरायण शासक के रूप में पूजा जाता है। ऐतिहासिक प्रतीकों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ से श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों में प्रशासन के प्रति रोष देखा जा रहा है।

UP Prime News एनालिसिस:

विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाना किसी भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। काशी के कायाकल्प के दौरान ऐतिहासिक संरचनाओं को सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत न हों।

वाराणसी | UP Prime News

Published: January 16, 2026 | 02:32 PM IST

By UP Prime News Desk

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