यूपी के विश्वविद्यालयों में बदलेगा परीक्षा नियम: गलत कॉपी जांचने पर शिक्षकों को भरना होगा भारी जुर्माना, पीजी छात्र भी करेंगे मूल्यांकन
उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में अब परीक्षाओं के मूल्यांकन में लापरवाही बरतना शिक्षकों को महंगा पड़ेगा। राजभवन के कड़े रुख के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा नियमावली (Examination Bye-laws) में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। नए नियमों के तहत, यदि मूल्यांकन के दौरान किसी शिक्षक द्वारा गंभीर लापरवाही या त्रुटि पाई जाती है, तो उन पर न केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, बल्कि भारी आर्थिक दंड (जुर्माना) भी लगाया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कॉपियां जांचते समय पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
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| फोटो : up prime news |
इस सुधार प्रक्रिया में एक और बड़ा बदलाव मेधावी पीजी (स्नातकोत्तर) और एम.टेक छात्रों को मूल्यांकन कार्य में शामिल करना है। शिक्षकों और शोध छात्रों (Research Scholars) की कमी के कारण अक्सर परीक्षा परिणाम घोषित होने में महीनों की देरी होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए अब मेधावी पीजी छात्रों को भी कॉपियां जांचने का अवसर और मानदेय दिया जाएगा। प्रायोगिक तौर पर इसकी शुरुआत एकेटीयू (AKTU) जैसे तकनीकी विश्वविद्यालयों से होगी, जहां एम.टेक छात्र शिक्षकों द्वारा पहले से जांची गई कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन करेंगे। यदि शिक्षकों और छात्रों द्वारा दिए गए अंकों में बड़ा अंतर मिलता है, तो संबंधित शिक्षक की जवाबदेही तय की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, मूल्यांकन कार्य में देरी करने वाले विभागों की जवाबदेही तय करने और कॉपियों की निगरानी डिजिटल माध्यम से करने पर भी विचार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा अपनी नियमावली में सुधार के बाद इसे आगामी सत्र से प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी है। राजभवन के इन स्पष्ट निर्देशों का लक्ष्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और मानवीय भूल के कारण छात्रों को होने वाली परेशानियों को समाप्त करना है।
खबर का बैकग्राउंड:
वर्तमान व्यवस्था में अक्सर देखा जाता है कि छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते और उन्हें 'चैलेंज इवैल्यूएशन' का सहारा लेना पड़ता है। कई बार पुनर्मूल्यांकन में अंकों का अंतर इतना अधिक होता है कि शिक्षक की योग्यता और ईमानदारी पर सवाल खड़े हो जाते हैं। इसी विसंगति को दूर करने के लिए परीक्षा नियमावली में कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस फैसले से उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें अब शिक्षकों की मानवीय भूल के कारण अंक सुधार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और समय पर परीक्षा परिणाम आने से उनका शैक्षणिक सत्र भी नियमित रहेगा। साथ ही, मेधावी छात्रों को मूल्यांकन का अनुभव और आर्थिक लाभ (मानदेय) भी प्राप्त होगा।
UP Prime News एनालिसिस:
परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की यह पहल छात्र हितों की रक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लखनऊ | UP Prime News
Published: January 14, 2026 | 07:52 AM IST
By UP Prime News Desk

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