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यूपी मतदाता सूची पुनरीक्षण में लापरवाही पर चुनाव आयोग सख्त: 8 क्षेत्रों के ईआरओ तलब, 18 जनवरी को फिर लगेगी चौपाल

 उत्तर प्रदेश (लखनऊ):

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने 'बुक अ कॉल विद बीएलओ' योजना के तहत शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण में ढिलाई पाए जाने पर आठ विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) से स्पष्टीकरण मांगा है। नियम के मुताबिक, मतदाताओं की समस्याओं का समाधान 48 घंटे के भीतर होना अनिवार्य है, लेकिन इन क्षेत्रों में 10 से अधिक मामले लंबे समय से लंबित पाए गए।

फोटो :- up prime news







प्रशासनिक कसावट के साथ-साथ पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सीईओ ने निर्देश दिए हैं कि आगामी 18 जनवरी को प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर दोबारा ड्राफ्ट मतदाता सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए), ग्राम प्रधानों और पार्षदों का सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। साथ ही बीएलओ के पास फॉर्म-6, 7 और 8 की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 24 घंटों में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए 46,279 नए आवेदन (फॉर्म-6) प्राप्त हुए हैं। अब तक कुल 18.53 लाख लोग नए मतदाता बनने के लिए आवेदन कर चुके हैं। वहीं, नाम कटवाने के लिए अब तक 50 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। तकनीकी त्रुटियों को रोकने के लिए विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन आवेदन के सत्यापन के समय नाम हिंदी में भी दर्ज किए जाएं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरों को रोकने के लिए सभी जिलों को त्वरित जवाब देने और शिकायतों के लिए एक्स (X) हैंडल का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

खबर का बैकग्राउंड:

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव/प्रक्रियाओं को देखते हुए मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। 'बुक अ कॉल विद बीएलओ' जैसी योजनाओं का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से मतदाताओं की समस्याओं को घर बैठे हल करना है, जिसमें देरी होने पर अब जवाबदेही तय की जा रही है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

चुनाव आयोग की इस सख्ती से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा। 18 जनवरी को बूथों पर लिस्ट लगने से लोग आसानी से अपना नाम चेक कर सकेंगे। साथ ही, ईआरओ पर कार्रवाई के डर से अब बीएलओ और अन्य अधिकारी मतदाताओं की शिकायतों का निपटारा 48 घंटे की समय सीमा के भीतर करने के लिए बाध्य होंगे, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।

UP Prime News एनालिसिस:

प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करना चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और लोकतंत्र में जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए एक आवश्यक कदम है।

[लखनऊ] | UP Prime News

Published: [14 जनवरी 2026] | [08:10 AM] IST

By UP Prime News Desk


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